उदयपुर, ,महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने राजस्थान कृषि महाविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय समन्वित औषधीय एवं सुगंधीय अनुसंधान परियोजना का निरीक्षण किया।
परियोजना प्रभारी डॉ. अमित दाधीच ने कुलगुरु को परियोजना द्वारा विकसित किस्मों प्रताप ईसबगोल-1, प्रताप असालिया-1, प्रताप अश्वगंधा-1 तथा चेतक अफीम की उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधकता, गुणवत्ता तथा क्षेत्रीय अनुकूलता के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने वर्तमान में चल रहे अनुसंधान कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया
कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने अनुसंधान कार्यों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा विकसित इन चारों किस्मों का अवलोकन किया। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिया कि किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान करते हुए उन्नत तकनीकों एवं नवाचारों के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाया जाए, जिससे किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर रोग व्याधि विशेषज्ञ डॉ. आर.एन. बुनकर ने औषधीय फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों तथा उनके नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। कुलगुरु महोदय ने कहा कि अफीम जो कि एक प्रमुख फसल है में विभिन्न प्रकार के रोग लगते हैं, इसलिए उनके प्रभावी नियंत्रण एवं निदान के लिए अनुसंधान पर अधिक जोर देने की आवश्यकता। तकनीकी सहायक डॉ. एन.के. पाड़ीवाल ने अनुसंधान परिणामों के किसानों तक प्रचार-प्रसार गतिविधियों एवं प्रथम पंक्ति प्रदर्शनों के बारे में जानकारी दी।