कोटा–बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से हाड़ौती में विकास के लगेगे नए पंख 

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Published on : 07 Mar, 26 18:03

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

कोटा–बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से हाड़ौती में विकास के लगेगे नए पंख 

राजस्थान के हाड़ौती अंचल के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब  प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के वीडियो संदेश और लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला  मतथा राजस्थान  के मुख्यमंत्री  भजनलाल  शर्मा एवं केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के  राममोहन नायडू की उपस्थिति में चम्बल नदी के किनारे स्थित शिक्षा और ऊर्जा के हब के रूप में मशहूर ऐतिहासिक नगरी कोटा के शंभूपुरा में कोटा–बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास किया गया। लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक और पर्यटन विकास के लिए एक नया द्वार खोलने वाली एक ऐतिहासिक पहल है। लगभग 1100 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस एयरपोर्ट में 20 हजार वर्गमीटर का आधुनिक टर्मिनल विकसित किया जाएगा, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी। 

वर्षों से कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के लोगों की मांग रही कि इस क्षेत्र को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ा जाए। वसुन्धरा राजे के कार्यकाल में इसकी पहल भी हुई लेकिन रन वे के छोटा होने तथा अन्य तकनीकी कमियों के चलते इसे मूर्त रूप में संचालित नहीं किया जा सका। अब तक यहां के नागरिकों को हवाई यात्रा के लिए जयपुर या जोधपुर जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों दोनों की हानि होती थी। ऐसे में इस नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण हाड़ौती क्षेत्र की लंबे समय से लंबित माँग और जरूरतों  को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि कोटा केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन का भी प्रमुख केंद्र है। यहां परमाणु, कोयला, गैस और जल आधारित सभी प्रकार की ऊर्जा उत्पादन होता है। इसके साथ ही कोटा डोरिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन और कोटा कचौरी जैसी स्थानीय पहचान देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। बूंदी के बासमती चावल और हाड़ौती का धनिया अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहचान बना चुके हैं। ऐसे में एयरपोर्ट बनने से इन उत्पादों के निर्यात और व्यापार को भी नई गति मिलने की संभावना है। पर्यटन की दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हाड़ौती क्षेत्र में केशवराय पाटन, खड़े गणेश मंदिर, गोदावरी धाम, गरड़िया महादेव और मुकुंदरा हिल्स जैसे अनेक धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं। साथ ही कोटा रिवर फ्रंट तथा सेवन वंडर्स पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं । बेहतर हवाई संपर्क मिलने से देश-विदेश के पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा। अब एयरपोर्ट बनने से यह क्षेत्र बहु-आयामी कनेक्टिविटी का उदाहरण बन सकता है।

कोटा को देश की प्रमुख “कोचिंग सिटी” के रूप में जाना जाता है, जहां हर वर्ष लाखों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। एयरपोर्ट बनने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यात्रा आसान होगी। इसके साथ ही आईटी और सेवा क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि आने वाले वर्षों में कोटा शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है।दरअसल, आधुनिक अर्थव्यवस्था में बेहतर कनेक्टिविटी विकास की आधारशिला मानी जाती है। सड़क और रेल के बाद हवाई संपर्क किसी भी क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कोटा पहले से ही दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और मजबूत रेल नेटवर्क से जुड़ चुका है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोटा में नए एयरपोर्ट बनाने  के लिए कोटा के सांसद और लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला के अथक प्रयासों की भूरी भूरी प्रशंसा भी की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिलान्यास के अवसर पर अपने संसदीय क्षेत्र और हाड़ौती की जनता से कहा कि दशकों से क्षेत्र की जनता ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की मांग कर रही थी। डबल इंजन की सरकार में यह सपना साकार हुआ है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि एयरपोर्ट के आसपास 600 हेक्टेयर क्षेत्र में रीको द्वारा औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो कोटा में उद्योगों और निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है।इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कहा कि कोटा में सड़क-रेल कनेक्टिविटी  के बाद अब एयर कनेक्टिविटी की सुविधा मिलने से यह क्षेत्र शिक्षा के साथ ही उद्योगों का भी हब बनेगा। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के  राममोहन नायडू ने बताया कि यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय और डबल इंजन सरकार का श्रेष्ठ उदाहरण है।

हालांकि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट की सफलता उसके समयबद्ध निर्माण और प्रभावी संचालन पर निर्भर करती है। यदि एयरपोर्ट समय पर बनता है और यहां से प्रमुख शहरों के लिए नियमित उड़ानें शुरू होती हैं, तो इसका प्रभाव केवल कोटा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे हाड़ौती अंचल के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगा।कुल मिलाकर, कोटा–बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हाड़ौती क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगी। यदि योजनाओं को सही दिशा में लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में हाड़ौती राजस्थान के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
 


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