लखनऊ: एचडीएफसी लाइफ ने उत्तर भारत के लिए अपने रेडी फॉर लाइफ इंडेक्स (आरएलआई) के क्षेत्रीय निष्कर्ष जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र वित्तीय रूप से आत्मविश्वासी तो है लेकिन लंबी अवधि की वित्तीय तैयारी के मामले में सुधार की आवश्यकता है। इप्सोस इंडिया के साथ मिलकर तैयार की गई इस रिपोर्ट में चार प्रमुख पहलुओं; वित्तीय योजना, आपातकालीन तैयारी,हेल्थ व वेलफेयर और रिटायरमेंट प्लानिंग आदि पर लोगों की धारणा और वास्तविक तैयारी का आकलन किया गया है।
उत्तर भारत का आरएलआई स्कोर 56 है। यह अखिल भारतीय औसत 59 से थोड़ा कम है। सर्वे में धारणा और वास्तविक कार्रवाई के बीच 30 अंकों का अंतर सामने आया है। यह दिखाता है कि लोगों का आत्मविश्वास तो अधिक है, लेकिन वित्तीय तैयारी के लिए ठोस कदम अपेक्षाकृत कम उठाए जा रहे हैं।
आपातकालीन तैयारी चिंता का विषय
सर्वे के अनुसार आपातकालीन तैयारी एक बड़ा सुधार क्षेत्र है। आधे से भी कम लोगों के पास आपातकालीन फंड (इमरजेंसी कॉर्पस) है। जिनके पास है भी, उनके लिए उसकी तरलता कम है। क्योंकि उस फंड तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय लग जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि अप्रत्याशित वित्तीय संकट से निपटने के लिए आसानी से उपलब्ध बचत विकल्पों की आवश्यकता है।
बचत की प्राथमिकताएं
वित्तीय प्राथमिकताओं के मामले में उत्तर भारत का रुझान राष्ट्रीय औसत के अनुरूप है। जहां बचत का प्रमुख उद्देश्य बच्चों की शिक्षा है। घर खरीदने या अपना घर बनाने तथा पारिवारिक व्यवसाय शुरू करने या विस्तार करने को लेकर भी अपेक्षाकृत अधिक प्राथमिकता दिखाई देती है। क्षेत्र के उपभोक्ता पोर्टफोलियो में विविधता दिखाई देती है। एफडी, हेल्थ इंश्योरेंस और एंडोमेंट पॉलिसियां सबसे अधिक खरीदे जाने वाले उत्पाद हैं। वहीं टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लेने वाले राष्ट्रीय औसत के बराबर हैं।
खुद और परिवार की सुरक्षा प्रमुख कारण
टर्म इंश्योरेंस खरीदने के पीछे प्रमुख प्रेरणा परिवार की सुरक्षा और मानसिक संतोष से जुड़ी हुई है। परिवार के भविष्य की सुरक्षा, विश्वसनीय लोगों की सलाह और मानसिक शांति की जरूरत टर्म इंश्योरेंस खरीदने के प्रमुख कारण हैं। गंभीर बीमारी जैसे जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी निर्णय को प्रभावित करते हैं। हालांकि, टर्म इंश्योरेंस के लाभों को लेकर जागरूकता की कमी, मेडिकल अंडरराइटिंग को लेकर चिंताएं और यह धारणा कि क्लेम न होने पर इसका लाभ सीमित है, ये सभी उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। इससे वित्तीय शिक्षा की आवश्यकता भी सामने आती है।
रिटायरमेंट योजना अभी शुरुआती चरण में
उत्तर भारत में रिटायरमेंट योजना अभी शुरुआती स्तर पर है। सर्वे में आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने अब तक रिटायरमेंट योजना शुरू नहीं की है। वहीं बड़ी संख्या में लोग रिटायरमेंट के बाद परिवार के सदस्यों से मध्यम से लेकर अधिक सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। ये रुझान इस बात का संकेत देते हैं कि लंबी आयु, बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल लागत और स्वतंत्र रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की आवश्यकता के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने की जरूरत है।
एचडीएफसी लाइफ का बयान
एचडीएफसी लाइफ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर विनीत अरोरा ने कहा, “उत्तर भारत में वित्तीय आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षाएं काफी मजबूत हैं। खासकर दौलत बनाने और परिवार की सुरक्षा को लेकर। रेडी फॉर लाइफ इंडेक्स यह दिखाता है कि लोग आत्मविश्वास को वास्तविक तैयारी में बदलने की इच्छा रखते हैं। चाहे वह सुरक्षा हो, आपातकालीन तैयारी हो या रिटायरमेंट की योजना। हमारा उद्देश्य लोगों को हर जीवन चरण में अपनी वित्तीय तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रेरित करना है।”