उदयपुर l उदयपुर जिले के कुराबड़ पंचायत समिति अंतर्गत आला की ढाणी क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका का बाल विवाह समय रहते रोक दिया गया। गायत्री सेवा संस्थान को प्राप्त सूचना के आधार पर जिला प्रशासन, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस तथा गायत्री सेवा संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से वर्तमान में संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत कार्यवाही की गई।
इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेन्द्र पण्ड्या ने जानकारी देते हुए बताया की बाल विवाह करवाने के साथ बाल विवाह में सहयोगी होना या सम्मिलित होना भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 अंतर्गत अपराध है l बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की सफलता हेतु सभी धार्मिक गुरुओं, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन को इसे समज कर इस कलंक को समाज से मिटाने हेतु सामूहिक प्रयास करना होगा l
आज रुकवाए गए बाल विवाह में बालिका की उम्र 16 वर्ष पाई गई, जो कि कानूनी रूप से विवाह के लिए निर्धारित आयु से कम है। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुँची और परिजनों को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों एवं इसके दुष्परिणामों के बारे में समझाइश की गई, जिसके बाद बाल विवाह को रुकवाया गया।
इस कार्रवाई में पटवारी देवेंद्र सिंह राजपूत, पूर्व सरपंच लक्ष्मण प्रजापत, गायत्री सेवा संस्थान से विवेक पालीवाल सहित जस्ट राइट टिम के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
टीम ने परिजनों को यह भी समझाया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। समाज में बाल विवाह की रोकथाम के लिए सभी की सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है l