नई दिल्ली । बिहार से सांसद भीम सिंह ने इंडियन रेलवे में ट्रेन पंक्चुएलिटी के बारे में एक सवाल उठाया और रेलवे नेटवर्क में समय पर परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी।
रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ट्रेन पंक्चुएलिटी को तय समय सीमा के अंदर पहुंचने वाली ट्रेनों के प्रतिशत से मापा जाता है और सरकार ने इसे बेहतर बनाने के लिए कई तरीके अपनाए हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे ने आईटी बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम और फॉग सेफ्टी डिवाइस जैसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजिकल टूल्स शुरू किए हैं, साथ ही डिटेल्ड ऑपरेशनल एनालिसिस के ज़रिए टाइमटेबल में स्ट्रक्चरल दिक्कतों को भी ठीक किया है। मंत्री ने बताया कि रिमोट डायग्नोस्टिक्स और प्वज्-बेस्ड सिस्टम के ज़रिए मेंटेनेंस के तरीकों में काफी सुधार हुआ है, जिससे ट्रेनों का भरोसा बेहतर हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि आईसीएफके से ज़्यादा भरोसेमंद एलएचबी डिज़ाइन में कोच का कन्वर्ज़न अब 90 प्रतिशत से ज़्यादा पूरा हो चुका है, जिससे सेफ्टी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार हुआ है।
इसके अलावा, कन्वेंशनल कोच से मॉडर्न ट्रेन सेट में बदलाव, जिन्हें अलग लोकोमोटिव की ज़रूरत नहीं होती, ने भरोसे को और बढ़ाया है। रोज़ाना लगभग 50,000 ट्रेनें चलने के बावजूद, मदुरै, जोधपुर, हुबली, भावनगर, कोटा, इज्जतनगर, रतलाम और अजमेर जैसे कई डिवीज़न ने 90-95 प्रतिशत से ज़्यादा पंक्चुएलिटी लेवल की रिपोर्ट दी है, जबकि ओवरऑल नेशनल पंक्चुएलिटी लगभग 70 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा कि भारत का परफॉर्मेंस फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे कई यूरोपियन देशों के बराबर है, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि रेलवे का लक्ष्य पंक्चुएलिटी के लिए जापान के बेंचमार्क तक पहुंचना है और जापान से अपनाई गई छह हफ़्ते की फॉरवर्ड मेंटेनेंस प्लानिंग जैसी प्रैक्टिस के अच्छे नतीजे दिखने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश से सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने ट्रेन पंक्चुएलिटी में सुधार को माना और बताया कि यह देश भर में लगभग 80 प्रतिशत और कुछ डिवीज़न में 97 प्रतिशत तक पहुँच गया है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार पैसेंजर-फेसिंग रियल.टाइम पंक्चुएलिटी डैशबोर्ड और ओपन डेटा एपीआई लाने का प्लान बना रही है ताकि रिसर्चर और आम लोग खुद से देरी के पैटर्न और ऑपरेशनल ट्रेंड को एनालाइज़ कर सकें।
जवाब, जैसा कि रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, यह सुझाव ज़रूरी और सही है और रेलवे ने पहले ही आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास जैसे बड़े इंस्टीट्यूशन के साथ-साथ दूसरे रिसर्चर को रेलवे टाइमटेबल और नेटवर्क ऑपरेशन को एनालाइज़ और ऑप्टिमाइज़ करने के लिए शामिल कर लिया है। उन्होंने बताया कि आईआईटी बॉम्बे ने टाइमटेबल ऑप्टिमाइज़ेशन पर काफी काम किया हैए जिसे अब सीआईआरएस (सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स) रियल-टाइम डेटा अपडेट और बेहतर नेटवर्क मैनेजमेंट के लिए लागू कर रहा है। मंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क को मैनेज करना बहुत मुश्किल है, जिसमें रोज़ाना लगभग 25,000 ट्रेनें मिले-जुले पैसेंजर और माल ढुलाई नेटवर्क पर चलती हैं। उन्होंने कहा कि जापान, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे देशों ने डेडिकेटेड पैसेंजर कॉरिडोर बनाकर एफिशिएंसी में सुधार किया है, जबकि कन्वेंशनल ट्रैक माल ढुलाई को हैंडल करते हैं। इसी तरह का तरीका अपनाते हुएए सरकार ने हाल के यूनियन बजट में पूरे नेटवर्क में एफिशिएंसी और पंक्चुएलिटी को और बेहतर बनाने के लिए सात नए हाई-स्पीड पैसेंजर कॉरिडोर की घोषणा की है।
सांसद पी. विल्सन, तमिलनाडु के प्रश्न के संबंध में रेल मंत्री ने कहा कि अब तक हम अपने लगभग 80 परसेंट ट्रैक अपग्रेड कर पाए हैं। ट्रैक अपग्रेडेशन एक बहुत बड़ा प्रोग्राम है जिसे हमने पिछले दशक में शुरू किया है और पहले के मुकाबले जब ट्रैक इस रफ़्तार से अपग्रेड नहीं होते थे, अब ट्रैक अपग्रेडेशन बहुतए बहुत सीरियस काम है और इसका नतीजा भी बहुत अच्छा रहा है। लगभग 80 परसेंट ट्रैक अब 100 एमपीएचके तक अपग्रेड हो गए हैं और लगभग 50 परसेंट ट्रैक अब सेमी-हाई स्पीड तक अपग्रेड हो गए हैं। सदस्य ने जो बात उठाई है, वह 130 केएूपीएच तक है। इसके साथ ही, हमने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं। सात नए प्रोजेक्ट अनाउंस किए गए हैं और चेन्नई को दो प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। एक चेन्नई से हैदराबाद, दूसरा चेन्नई से बेंगलुरु ए और इससे चेन्नई से बेंगलुरु की दूरी सच में, सच में बहुत कम हो जाएगी। चेन्नई से बेंगलुरु का सफ़र 73 मिनट का हो जाएगा।