‘राज सखी मेले’ का शुभारंभ , लोक संस्कृति और हस्तशिल्प का अनूठा संगम

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Published on : 15 Mar, 26 15:03

‘राज सखी मेले’ का शुभारंभ , लोक संस्कृति और हस्तशिल्प का अनूठा संगम

उदयपुर। राजस्थान दिवस के अवसर पर जिले में आयोजित किए जा रहे विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत रविवार को नगर निगम प्रांगण स्थित टाउन हॉल परिसर में जिला प्रशासन तथा राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय राज सखी मेले का भव्य शुभारंभ उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा आमजन उपस्थित रहे।

विधायक फूलसिंह मीणा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने कौशल के बल पर परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मेलों के आयोजन से ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के विपणन का अवसर मिलता है, जिससे उनके कार्य को नई पहचान और प्रोत्साहन मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान विधायक मीणा एवं समाजसेवी गजपाल सिंह द्वारा स्वयं सहायता समूहों की सखियों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए टैबलेट वितरित किए गए। इसके साथ ही कृषि विभाग के माध्यम से कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के अंतर्गत किसानों को ट्रैक्टर तथा कृषि यंत्र-उपकरण भी वितरित किए गए, जिससे आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिल सके।

राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक ख्यालीलाल खटीक ने बताया कि यह मेला 7 दिनों तक चलेगा और प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, घरेलू उत्पाद, सजावटी सामग्री तथा स्थानीय खाद्य पदार्थों की आकर्षक स्टॉल लगाई गई हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री का मंच मिलेगा।

मेले में आगंतुकों के मनोरंजन और सहभागिता के लिए पारंपरिक खेलकूद गतिविधियों का भी आयोजन किया गया है। इसके साथ ही फूड जोन में विभिन्न प्रकार के स्थानीय व्यंजन उपलब्ध रहेंगे, जो आगंतुकों को राजस्थान की पारंपरिक स्वाद संस्कृति से रूबरू कराएंगे। ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और हस्तशिल्प की विविधता मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

मेले के अंतर्गत प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। 15 मार्च को राजस्थानी लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा, जबकि 16 मार्च को सूफी संगीत गायन एवं बॉलीवुड गीतों का ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुत किया जाएगा। 17 मार्च को वाद्य संगीत एवं जुगलबंदी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

इसी क्रम में 18 मार्च को पपेट शो तथा सांस्कृतिक मंचन के साथ मयूर नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। 19 मार्च को जादूगर शो, विचित्र वेशभूषा प्रतियोगिता तथा गवरी नृत्य का आयोजन होगा। वहीं 20 मार्च को कच्छी घोड़ी नृत्य तथा लंगा-लंगा बंधुओं द्वारा राजस्थानी लोक संगीत की विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। मेले में पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताएं, उत्कृष्ट हस्तशिल्प उत्पादों की स्टॉल, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली प्रदर्शनी तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। आयोजन के माध्यम से जहां ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक अवसर मिलेंगे, वहीं शहरवासियों को राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं, कला और संस्कृति से रूबरू होने का अवसर भी प्राप्त होगा।


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