नई दिल्ली, : फ्लिपकार्ट ने “The Last-Mile Leap: Empowering Delivery Fleets to Accelerate India’s Electric Mobility Transition” नाम से एक व्हाइटपेपर जारी किया है। यह रिपोर्ट भारत भर के 6,000 से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स के सर्वे पर आधारित है। इसमें यह देखा गया है कि भारत के लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स वर्कफोर्स EV अपनाने के लिए कितनी तैयार है, और बड़े स्तर पर इसे अपनाने के लिए किन बदलावों की जरूरत है।
डिलीवरी पार्टनर्स में EV अपनाने को लेकर मजबूत रुचि
स्टडी में पाया गया कि डिलीवरी पार्टनर्स के बीच EV अपनाने को लेकर काफी रुचि है। लगभग 46% लोगों ने EV में बदलाव करने की इच्छा जताई, जो वर्कफोर्स की मजबूत तैयारी को दिखाता है। हालांकि, अभी भी 94.3% डिलीवरी पार्टनर्स पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन इस्तेमाल करते हैं। इससे पता चलता है कि इच्छा और वास्तविक अपनाने के बीच का अंतर मुख्य रूप से सिस्टम से जुड़ी बाधाओं के कारण है, न कि लोगों की सोच के कारण।
डिलीवरी पार्टनर्स द्वारा बताई गई मुख्य चुनौतियां:
● गाड़ी की ज्यादा शुरुआती लागत (26.6%)
● कुछ क्षेत्रों में EV की सीमित उपलब्धता (22.8%)
● रेंज और परफॉर्मेंस को लेकर चिंता (17.8%)
● चार्जिंग सुविधा की कमी (14%)
● परफॉर्मेंस की विश्वसनीयता (11.8%)
● सर्विस और लाइफसाइकल सपोर्ट (7%)
ऑपरेशनल पैटर्न EV की क्षमता के अनुकूल हैं
रिसर्च से यह भी सामने आया कि भारत में डिलीवरी का काम मौजूदा इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की क्षमता के अनुसार है। करीब 29% डिलीवरी पार्टनर्स रोज 40–60 किलोमीटर चलते हैं, जबकि 21.8% रोज 60–80 किलोमीटर चलते हैं। ये दूरी ज्यादातर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की क्षमता के अंदर आती है, चाहे शहर में बार-बार रुककर डिलीवरी करनी हो। ईंधन खर्च भी एक बड़ा खर्च है — सर्वे में शामिल करीब 90% डिलीवरी पार्टनर्स हर महीने ₹2,000 से ₹5,000 पेट्रोल पर खर्च करते हैं।
फ्लिपकार्ट ग्रुप के हेड ऑफ सस्टेनेबिलिटी, निशांत गुप्ता ने कहा, “फ्लिपकार्ट में सस्टेनेबिलिटी का मतलब ऐसा सिस्टम बनाना है जो पर्यावरण और हमारे प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों दोनों के लिए फायदेमंद हो। डिलीवरी पार्टनर्स के लिए वाहन का चुनाव आर्थिक निर्णय होता है। इलेक्ट्रिक वाहन ऑपरेटिंग लागत को काफी कम कर सकते हैं और आय को स्थिर बना सकते हैं। साथ ही, लास्ट-माइल डिलीवरी EV के लिए सबसे व्यावहारिक क्षेत्र है क्योंकि इसका उपयोग ज्यादा और ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में होता है।”
व्हाइटपेपर में दिए गए इंडस्ट्री रिसर्च के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ईंधन और ऊर्जा खर्च को 70-80% तक कम कर सकते हैं, जबकि कम मेंटेनेंस के कारण डिलीवरी पार्टनर्स की आय में 15-20% तक बढ़ोतरी हो सकती है।
लास्ट-माइल डिलीवरी EV अपनाने के लिए बड़ा अवसर
व्हाइटपेपर में बताया गया है कि लास्ट-माइल डिलीवरी EV अपनाने के लिए सबसे प्रभावी क्षेत्रों में से एक है। शहरों में छोटी दूरी, बार-बार उपयोग और ज्यादा उपयोग होने के कारण, डिलीवरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक बनाने से निजी वाहनों की तुलना में ज्यादा प्रदूषण कम किया जा सकता है और ज्यादा आर्थिक लाभ मिल सकता है। क्लाइमेट ग्रुप की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (इंडिया), दिव्या शर्मा ने कहा, “दुनिया भर में ज्यादा उपयोग वाले फ्लीट सेगमेंट्स ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत की है। शहरी लास्ट-माइल डिलीवरी इसी श्रेणी में आती है। अगर इस क्षेत्र को सही फाइनेंस, चार्जिंग और डिलीवरी-रेडी वाहनों का सपोर्ट मिले, तो भारत EV अपनाने की गति तेज कर सकता है।”
EV अपनाने को बढ़ाने के लिए इकोसिस्टम का सहयोग जरूरी
व्हाइटपेपर में कहा गया है कि बड़े स्तर पर डिलीवरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक बनाने के लिए EV इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों में मिलकर काम करना जरूरी है।
रिसर्च में बताए गए मुख्य उपाय:
● लीजिंग और सस्ते लोन जैसे फाइनेंस विकल्प
● डिलीवरी हब के हिसाब से चार्जिंग सुविधाएं
● डिलीवरी के लिए उपयुक्त EV डिजाइन
● डिलीवरी पार्टनर्स के लिए ट्रेनिंग और ऑनबोर्डिंग
● सर्विस नेटवर्क और बैटरी हेल्थ ट्रैकिंग
बेंगलुरु में EV मेला के दौरान Flipkart ने इस सहयोग को बढ़ावा दिया, जहां TVS, Bajaj, Hero, Motovolt और Ampere जैसे EV निर्माता और IDFC जैसी फाइनेंस कंपनियां शामिल हुईं।
इस कार्यक्रम में डिलीवरी पार्टनर्स ने EV मॉडल देखे, फाइनेंस विकल्प समझे और सीधे कंपनियों से बातचीत की, जिससे कई समस्याओं का समाधान करने में मदद मिली। Flipkart ने “EV Pioneers” डिजिटल बैज भी शुरू किया, ताकि EV अपनाने वाले शुरुआती पार्टनर्स को पहचान और प्रोत्साहन मिल सके। भारत 2030 तक 30% EV लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस व्हाइटपेपर के अनुसार, लास्ट-माइल डिलीवरी जैसे ज्यादा उपयोग वाले सेक्टर इस बदलाव को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।