संस्कृत की स्वर-लहरियों से गुंजायमान हुआ नवसंवत्सर: उदयपुर में शोभायात्रा बनी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

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Published on : 22 Mar, 26 18:03

“नवसंवत्सरस्य हार्दिकाः शुभाशयाः” तथा “मातृभूमिः भारतम् – मातृभाषा संस्कृतम्” जैसे ओजस्वी घोषवाक्यों से वातावरण गुंजायमान हो उठा

संस्कृत की स्वर-लहरियों से गुंजायमान हुआ नवसंवत्सर: उदयपुर में शोभायात्रा बनी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक

उदयपुर। भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर नववर्ष समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य शोभायात्रा में इस वर्ष भी संस्कृतभारती की सक्रिय सहभागिता ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा और उत्साह से सराबोर कर दिया। संस्था के कार्यकर्ताओं ने पूर्व की भांति इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि संस्कृत भाषा के माधुर्य से जन-जन को जोड़ने का प्रेरणादायी प्रयास भी किया।
शोभायात्रा के दौरान “संस्कृतं सर्वत्र – संस्कृतं सर्वेषाम्”, “वदतु संस्कृतम् – जयतु भारतम्”, “नवसंवत्सरस्य हार्दिकाः शुभाशयाः” तथा “मातृभूमिः भारतम् – मातृभाषा संस्कृतम्” जैसे ओजस्वी घोषवाक्यों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

इस अवसर पर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा ने भी संस्कृत के घोष वाक्य बोलकर नव संवत्सर की शुभकामनाएं दी।
 कार्यकर्ताओं ने संस्कृत में संवाद करते हुए गीत, सूक्तियाँ एवं आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय नववर्ष का संदेश अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रसारित किया। संस्कृत गीतों पर प्रस्तुत किए गए उत्साहपूर्ण नृत्य ने भी जनसमूह का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
संस्कृतभारती की इस सहभागिता का मूल उद्देश्य भारतीय नवसंवत्सर के वास्तविक स्वरूप और उसके सांस्कृतिक महत्व को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना रहा। साथ ही, संस्कृत भाषा को व्यवहारिक और जन-सुलभ बनाते हुए उसे जनजीवन से जोड़ने का सशक्त संदेश भी दिया गया। संस्था के इन प्रयासों से शोभायात्रा में एक विशिष्ट सांस्कृतिक चेतना का संचार हुआ, जिससे उपस्थित नागरिकों में संस्कृत के प्रति नई जिज्ञासा और आत्मीयता का भाव जागृत हुआ।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने आमजन को संस्कृत में नववर्ष की शुभकामनाएँ देकर सौहार्द्र, अपनत्व और भारतीयता की भावना को सुदृढ़ किया।
इस अवसर पर संरक्षक ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा, प्रचार प्रमुख  रेखा सिसोदिया, दिव्यम आमेटा, शिक्षण प्रमुख श्रीयांश कंसारा, प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा सहित अनेक कार्यकर्ता उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे।
यह शोभायात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपरा के पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम बनकर सामने आई।
 


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