उदयपुर। भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। शोभायात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा शहर भगवामय हो गया।
भव्य शोभायात्रा भंडारी दर्शक मंडप (गांधी ग्राउंड) से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर निगम प्रांगण पहुंची। शोभायात्रा में विभिन्न समाजों की आकर्षक झांकियां, अखाड़े, धार्मिक ध्वज एवं ढोल-नगाड़ों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
शोभायात्रा के दौरान मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं एवं समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर भारतीय नववर्ष के उत्साह को अभिव्यक्त कर रहे थे।
झांकियां आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा में ऊंट, घोड़े एवं बग्घियों के साथ विभिन्न विषयों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। आर्य समाज की झांकी, पर्यावरण संरक्षण, माता शबरी तथा जनजातीय समाज द्वारा भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण से संबंधित झांकियां विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहीं।
खड़ग धारण करती मातृशक्ति
500 से अधिक मातृशक्ति खड़ग धारण कर शोभायात्रा में सहभागी बनीं, जिन्होंने आयोजन को विशेष भव्यता प्रदान की।
झांकियों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक
शोभायात्रा में भारतीय संस्कृति की वैदिक परंपरा को दर्शाती हवन करती हुई झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
धर्मसभा के शुभारंभ से पूर्व भारत माता को पुष्पांजलि एवं दिप प्रज्ज्वलित किया गया। पूज्य संतों को धनुष-बाण स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। वहीं जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण एवं जनजातीय वीरों की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसके कलाकारों का मंच पर स्वागत किया गया।
धर्मसभा में संतों के उद्बोधन
धर्मसभा में परमपूज्य ब्रह्मचारी श्री श्री गुरु गुलाबदास जी महाराज (मांकड़ादेव धाम, झाड़ोल) ने अपने उद्बोधन में भारतीय नववर्ष के महत्व पर बताते हुए स्व के बोध का संदेश दिया।
वहीं परमपूज्य श्री ज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज (कैलाश टेकरी, खमनोर) ने अपने उद्बोधन में कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता एवं पर्यावरण संरक्षण पर विचार व्यक्त किए।
इसके पश्चात समिति के संयोजक डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने सभी संत-महात्माओं, अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन विकास छाजेड़ एवं कवि डॉ. वैभव भल्लार द्वारा किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में रेपरिया बालम की प्रस्तुति
अंत में रेपरिया बालम फेम अशोक मंडा विश्नोई एवं उनकी टीम ने देशभक्ति एवं राजस्थानी गीत-संगीत की प्रस्तुतियां दीं, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।