नई दिल्ली। उत्तर मध्य रेलवे ने रविवार को प्रयागराज-कानपुर सेक्शन (190 रूट किलोमीटर) पर ‘‘कवच’’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। ‘‘कवच’’ प्रणाली को औपचारिक तौर पर गाड़ी संख्या 14163 के माध्यम से लागू किया गया। इस ट्रेन के लोकोमोटिव में उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री एन.पी. सिंह ने ‘‘कवच’’ प्रणाली के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ट्रेन संख्या 14163 में सवार होकर सूबेदारगंज से मनौरी स्टेशन तक ‘‘फुटप्लेट निरीक्षण’’ भी किया।
पहले चरण में, ‘‘कवच’’ को इस मार्ग पर संचालित हो रही आठ जोड़ी ट्रेनों, जिसके तहत गाड़ी संख्या 14113/14114, 14163/14164, 12307/12308, 12417/12418, 22437/22438, 15003/15004, 20433/20434 और 12403/12404 पर लागू किया जाएगा। इसके अलावा अन्य ट्रेनों और ‘‘वंदे भारत’’ ट्रेनों को भी धीरे-धीरे इसमें शामिल किया जाएगा।
यह शुरुआत भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण सेक्शनों में से एक पर 160 किमी/घंटा की गति से ट्रेन चलाने, रेलवे सुरक्षा को बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस प्रणाली को शुरू करने से पहले, व्यापक और कड़े परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए थे। इन परीक्षणों में डब्ल्यूएपी-7 लोकोमोटिव के साथ 8, 16 और 22 एलएचबी कोच वाली संरचनाएं और साथ ही 20 कोच वाली ‘‘वंदे भारत’’ रेक शामिल थी, जिससे विभिन्न परिचालन स्थितियों के तहत प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकी।
ट्रेन संख्या 15003/15004 (चौरी चौरा एक्सप्रेस) का उपयोग करके यात्री परीक्षण भी किए गए, जिन्होंने नियमित सेवा के दौरान लगातार और विश्वसनीय प्रदर्शन प्रदर्शित किया। 20,000 किलोमीटर से ज़्यादा की यात्री ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं और सभी सिस्टम जाँच संतोषजनक पाई गई हैं। कवच सिस्टम ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन, खतरे के सिग्नल को पार करने से बचा, इंसानी गलती होने पर अपने-आप ब्रेक लगना आदि विशेषताओं के कारण रेलवे संरक्षा को काफ़ी बेहतर बनाता है। कवच ‘‘मेक इन इंडिया’’ पहल के तहत देश में ही बनाया गया एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। इसे भारतीय रेलवे में धीरे-धीरे लगाया जा रहा है, ताकि सुरक्षा को मज़बूत किया जा सके और ट्रेनों के संचालन को आधुनिक बनाया जा सके।
यह उपलब्धि प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री सतेंद्र कुमार के नेतृत्व में उत्तर मध्य रेलवे की सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन टीम की लगन भरी कोशिशों और तालमेल से किए गए काम से संभव हो सका है। इस कार्य में सभी संबंधित विभागों का सहयोग मिला। उत्तर मध्य रेलवे आधुनिक संरक्षा तकनीकों को अपनाने और भारतीय रेलवे के सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसका मकसद यात्रियों के लिए ट्रेनों का संचालन ज़्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाना है।
अगले चरण में, ‘‘मिशन रफ़्तार’’ के लक्ष्यों में से एक के तौर पर, गाज़ियाबाद-टुंडला सेक्शन में कवच सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाया जा सके।