शिक्षक ने मृत्यु के बाद भी दिया मानवता का संदेश: अंगदान से कई जिंदगियां बचीं

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Published on : 24 Mar, 26 14:03

शिक्षक ने मृत्यु के बाद भी दिया मानवता का संदेश: अंगदान से कई जिंदगियां बचीं

चित्तौड़गढ़ के एक परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए केडेवेरिक अंगदान (Deceased Organ Donation) के माध्यम से कई लोगों को नया जीवन देने का कार्य किया।
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर में चित्तौड़गढ़ निवासी 62 वर्षीय श्री कन्हैयालाल आनंद को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के पश्चात उनकी अंतिम इच्छानुसार उनके परिवार द्वारा अंगदान का निर्णय लिया गया। यह अंगदान स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ।
रोगी को 19 मार्च 2026 को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था, जहां उपचार के दौरान 23 मार्च 2026 को चिकित्सकों की टीम द्वारा उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके पश्चात परिवारजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान के लिए सहमति प्रदान की।
हॉस्पिटल की ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम में डॉ. गोविन्द मंगल, डॉ. निलेश भटनागर, डॉ. विनोद मेहता, डॉ. ऋषि मेहता, डॉ. करुणा शर्मा (नोडल ऑफिसर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट), डीएमएस हर्षा सोनी तथा ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर राजेश मेहता के मार्गदर्शन में अंगदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की गई।
अंगदान के उपरांत ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दोनों किडनियों को उदयपुर से हवाई मार्ग द्वारा SMS Hospital Jaipur भेजा गया, जबकि नेत्र (आंखें) Eye Bank Society Udaipur को दान किए गए। इस पूरी प्रक्रिया में उदयपुर एवं जयपुर जिला पुलिस प्रशासन का विशेष योगदान रहा।
इसके पश्चात शाम पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ परिजनों को सौंप दिया गया। इस दौरान हॉस्पिटल के प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। माहौल अत्यंत भावुक हो गया और उपस्थित जनसमूह ने “कन्हैयालाल आनंद अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। जीएमसीएच के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. हरप्रीत सिंह ने समय पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कराने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
परिवारजनों के अनुसार, कन्हैयालाल आनंद एक समर्पित शिक्षक होने के साथ-साथ समाज सेवा में भी सक्रिय थे। वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे तथा विशेष रूप से गरीब बच्चों की शिक्षा में सहयोग करते थे। उनका मानना था कि समाज के लिए कुछ कर जाना ही सच्ची सेवा है। वे अक्सर कहा करते थे कि उनके निधन के बाद उनके अंग दान कर दिए जाएं, ताकि उनका जीवन किसी और के काम आ सके।
मृतक के पुत्र राहुल आनंद ने बताया कि पूरा परिवार उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए एकजुट हुआ।
जीएमसीएच के सीईओ श्री ऋषि कपूर ने हॉस्पिटल परिवार की ओर से अंगदाता एवं उनके परिजनों को नमन करते हुए इस पुनीत कार्य के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने डिविजनल कमिश्नर, आईजी पुलिस, पुलिस अधीक्षक, सीएमएचओ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा ट्रैफिक कंट्रोल टीम का सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।


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