के डी अब्बासी
कोटा : फोटोग्राफी के डॉक्टर कहो या इंजीनियर कहो , फोटो कला के इबादगार फोटो कला मंदिर के पुजारी कहो या कलामंदिर के पुजारी वरिष्ठ पत्रकार सुधींद्र गौड़
के जन्म दिन पर कोटा शहर के पत्रकार साथी ,पत्रकार संगठन, समाजसेवी , राजनितिक क्षेत्र से जुड़े लोग सुधींद्र गौड़ को जन्म दिन पर बधाइयां दे रहे हैं।
हंसना,हंसाना, मुस्कुराना, मिलनसारी , एक इबादत है। फोटों खेंचना एक कला और इस कला को सहज कर सजा कर रखी जाने वाली जगह कला मंदिर कहलाता है। जी हाँ दोस्तों में बात कर रहा हूँ एक हँसते , मुस्कुराते , खूबसूरत फोटो ग्राफ़ी कला में पारंगत सुधींद्र गोड़ की जिन्हे कला विरासत में मिली है।कभी रामपुरा के बीचों बीच,कोटा में ही नहीं राजस्थान में ही नहीं देश भर में सुप्रसिद्ध फोटो ग्राफ़ी की दूकान कलामंदिर में वरिष्ठ पत्रकार सुधींद्र गौड़ अपने पिता के साथ फोटोग्राफी की दुनिया के इस मंदिर के पुजारी रहे है।ऐसे पुजारी जिनके कैमरे में कोटा की ही नहीं , देश भर की अज़ीम हस्तियों के फोटो क़ैद हुए । नेहरू जी हों इंद्रा जी हों राजीव जी हों राहुल जी हों अटल बिहारी वाजपेयी हों या चंद्रशेखर हों, मंत्री , मुख्यमंत्री प्रसिद्ध कवि , शायर पत्रकार नामचीन लोग हों सभी के फोटो इनके कैमरे में हमेशा क़ैद रहते हैं। सुधींद्र गौड़ राजस्थान पत्रिका , नव ज्योति , राष्ट्रदूत ,सहित कई अख़बारों के प्रेस फोटोग्राफर रहे। पत्रकारिता से जुड़े रहे इनके वालिद नारायण शील की सहजता सरलता
की साहित्यिक परवरिश में इनका अंदाज़ भी मोहब्बत का खुलूस का हंसने का हंसाने है। बात बात में चुटकुले , हंसी मज़ाक़ ,रोतों हुओं को हंसा कर , खुश करना इनकी खुशमिजाज़ी है। सुधींद्र गोड किसी पहचान के मोहताज नहीं बरसों बरस कोटा मेला दशहरे के सभी नामचीन राष्ट्रिय कार्यक्रमों में प्रमुख फोटोग्राफर रहे। राष्ट्रिय पर्व हो सरकारी कार्यक्रम हों , बढे बढे नेताओं की प्रेसकॉन्फ्रेंस हों सुधींद्र गोड , ब्लेक ऐंड वाहिट , फिर रंगीन , फिर वीडियोग्राफी , डिजिटल युग सहित हर बदलते फोटोग्राफी टेक्निक के साथ अव्वल रहे है। सुधींद्र गौड़
के खज़ाने में आज भी हर फोटोग्राफ एक ऐतिहासिक दस्तावेज की अहमियत रखता है ।इंद्रा गाँधी कोटा के टूर पर हों और स्थानीय नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने में हिचक करे तो उन्हें रोक कर फोटो शूट करने वाले सुधींद्र गौड़ ने अटल बिहारी वाजपेयी हों ,लालकृष्ण आडवाणी हों ,, सुनील दत्त हों , ज़ीनत अमान हों , प्रसिद्ध कवि , प्रसिद्ध शायर, कांग्रेस भाजपा या फिर , जनता पार्टी के नामचीन नेता हों , सभी के तो फोटो इनके कैमरे में क़ैद रहे है।उस वक़्त की बात है।जब फोटो खेंचने के बाद रील कट कर तत्काल फोटो डवलप होता , फोटो , महालक्ष्मी ब्लॉक के वहीद भाई के पास जाता , उनसे मिन्नतें होतीं , फिर ब्लॉक बनता अख़बारों में ब्लॉक जाते और वोह फोटो चाहे सरकारी स्तर के हों चाहे गैर सरकारी स्तर के चाहे राजनीतिक स्तर के तब कहीं जाकर अख़बारों में ट्रेडिल मशीन के साथ कम्पोज़िंग टाइपिंग में मेकअप होकर छापे जाते थे। अब वक़्त बदल गया है , जेब में से मोबाईल निकालो , फोटो खेंचो और तुरतं फोटो जिधर चाहो भेज दो लेकिन फोटोग्राफी के ऐंगल आर्ट , अलग अलग अंदाज़ में फोटो खेंचने की कला ,आज भी , कलामंदिर के इस पुजारी वरिष्ठ पत्रकार सुधींद्र गोड़ के पास है। सुधींद्र गौड़
को उनकी सालगिरह पर अधिस्वीकृत पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष, पूर्व संयुक्त निदेशक सूचना एव जनसंपर्क विभाग, वरिष्ठ पत्रकार लेखक डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल, स्वतंत्र पत्रकार के डी अब्बासी, भारत की महिमा के प्रधान संपादक डी एन गांधी, संपादक बृजराज सिंह सोलंकी, सहायक संपादक कादर खान, राजस्थान अधिस्वीकृति महासंघ के लीगल एडवाइजर वरिष्ठ पत्रकार एडवोकेट अख्तर खान अकेला,एडवोकेट इकरामुद्दीन खान ने बधाई दी है।