दिल्ली-एनसीआर को मिली नई उड़ान: जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन, विकास की नई दिशा

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Published on : 29 Mar, 26 05:03

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

दिल्ली-एनसीआर को मिली नई उड़ान: जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन, विकास की नई दिशा

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को एक बड़ी सौगात देते हुए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का उद्घाटन किया। यह एयरपोर्ट न केवल भारत का, बल्कि एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के विमानन ढांचे को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को भी अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद है। जेवर एयरपोर्ट के साथ ही अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पांच एयरपोर्ट इन्दिरा गाँधी इंटरनेशनल टर्मिनल -3,टर्मिनल -2,टर्मिनल -1 तथा हिंडन एयरपोर्ट हो गए है। इसके साथ ही इन्दिरा गाँधी इंटरनेशनल टर्मिनल पर कंजंक्शन होने अथवा मौसम खराब होने के कारण विमानों को जयपुर या चंडीगढ़ आदि निकटवर्ती हवाई अड्डों की ओर डायवर्ट करने की समस्या का निदान भी हो सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में कहा कि जेवर एयरपोर्ट “नए भारत की नई सोच और नई कार्य संस्कृति” का प्रतीक है। उन्होंने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत अभियान और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का सशक्त उदाहरण बताया। गौरतलब है कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में विकसित किया गया है, जो राष्ट्रीय राजधानी से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में से एक है, जहां यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही, यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि दो बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स के संचालन से दिल्ली- एनसीआर भारत का प्रमुख एविएशन हब बन सकता है, जिससे वैश्विक कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

जेवर एयरपोर्ट परियोजना से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की भी संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, होटल, और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का तेजी से विकास होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र एक प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। इसके साथ ही, एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाएं जैसे एक्सप्रेस वे, मेट्रो और रेल लिंक भी क्षेत्रीय विकास को गति देंगी।पर्यावरण और आधुनिक 
जेवर एयरपोर्ट को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों के साथ विकसित किया गया है। इसे “ग्रीन एयरपोर्ट” के रूप में तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी को प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल तकनीकों और स्मार्ट सिस्टम के जरिए यात्रियों को बेहतर और सहज अनुभव देने का प्रयास किया गया है। यह एयरपोर्ट केवल नागरिक उड्डयन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के उत्तरी हिस्से में एक और बड़े एयरपोर्ट का होना आपात स्थितियों और आपदा प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगा।

विश्लेषकों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के विकास की नई धुरी बन सकता है। यह परियोजना “इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से विकास” की नीति को साकार करती है, जिसमें परिवहन और कनेक्टिविटी को आर्थिक प्रगति का आधार बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत तेजी से वैश्विक एविएशन मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जेवर एयरपोर्ट इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

कुल मिला कर जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन केवल एक नई सुविधा की शुरुआत नहीं, बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह परियोजना न केवल दिल्ली- एनसीआर की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक सशक्त एविएशन हब के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में इसका प्रभाव क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और निवेश के रूप में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।


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