रिकॉर्ड बजट आवंटन और आधुनिकीकरण के प्रबल प्रयासों से यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है

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Published on : 02 Apr, 26 18:04

नए ट्रैक निर्माण, ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशनों पर भारी खर्च से हमारी ट्रेन यात्रा सुरक्षित, आरामदायक और किफायती बन रही है

रिकॉर्ड बजट आवंटन और आधुनिकीकरण के प्रबल प्रयासों से यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है

नई दिल्ली। 1338 में से 208 अमृत भारत स्टेशनों पर आधुनिकीकरण का काम पूरा हो चुका है, 157 अमृत भारत स्टेशनों वाले आकांक्षी जिले सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देंगे। भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन के बाद, विजयवाड़ा पीपीपी मॉडल के तहत विकसित होने वाला भारत का दूसरा स्टेशन बनने के लिए तैयार है।
इस मॉडल के तहत 14 और स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, 6,117 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे यात्रियों का अनुभव बेहतर हो रहा है। कार्यालयों, स्टेशनों और आवासीय कॉलोनियों में 100 प्रतिशत एलईडी प्रकाश व्यवस्था लागू की गई है, जिससे रेलवे में ऊर्जा दक्षता और हरित पर्यावरण को बढ़ावा मिल रहा है। लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में 120 वंदे भारत ट्रेनसेटों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। आधुनिक एमईएमयू उत्पादन के लिए काजीपेट में विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएगी।
श्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप, 2025-26 में होने वाली ट्रेन दुर्घटनाओं में 89 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह संख्या घटकर 16 रह गई है। 128 गति शक्ति मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनलों के विकास के लिए नीति के तहत लगभग 9183 करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया है। 292 और जीसीटी के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। भारतीय रेलवे आउटसोर्स किए गए श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करता है। श्रमिक कल्याण पोर्टल, जागरूकता शिविर और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से कड़ी निगरानी द्वारा उनकी सुरक्षा को मजबूत किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेलवे में पूंजी निवेश के लिए सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) 2013-14 में 29,055 करोड़ रूपये से बढ़कर 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रूपये हो गई है। इस बढ़ी हुई बजटीय सहायता से नेटवर्क विस्तार, सुरक्षा सुधार, यात्री सुविधाओं, सड़क सुरक्षा कार्यों, प्रौद्योगिकी उन्नयन और वंदे भारत विनिर्माण सहित रोलिंग स्टॉक संवर्धन में महत्वपूर्ण निवेश संभव हो पाया है। सरकार ने बजट अनुमान 2026-27 में 2,78,030 करोड़ रूपये की सकल बजटीय सहायता प्रदान की है, जिसमें से 79,072 करोड़ रूपये नए ट्रैक के निर्माण के लिए आवंटित किए गए हैं।
ट्रैक अवसंरचना का उन्नयन
भारतीय रेलवे में ट्रैक अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, उन्नयन, आधुनिकीकरण और सुधार एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। पटरियों का उन्नयन और नवीनीकरण एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। पटरियों का नवीनीकरण निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाता है, जो उनकी आयु, यातायात, स्थिति आदि पर आधारित होते हैं। पटरियों के नवीनीकरण कार्यों की योजना और क्रियान्वयन पटरियों की स्थिति और अन्य विभिन्न कारकों को प्राथमिकता देते हुए किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पटरियां अनुमत गति से चलने के लिए सुरक्षित हैं। वर्ष 2014-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान जबलपुर से कटनी होते हुए दमोह मार्ग सहित पूरे रेलवे नेटवर्क में किए गए पटरियों के नवीनीकरण का कार्य किया गया है, जिसके तहत स्टेशनों के नाम 157, आबू रोड, अनुग्रह नारायण रोड, अराकू, अररिया कोर्ट, बहराईच, बलांगीर, बलरामपुर, बालसिरिंग, बांका, बनमनखी, बानो, बड़ागामदा जंक्शन, बारां, बरौनी, बरगावांए बरहनी, बरकाकाना, बारसोई जंक्शन, बासुकीनाथ, बेगुसराय, भद्राचलम रोड, भानुप्रतापपुर, भवानीपटना, बियावरा राजगढ़, बोकारो स्टील सिटी, चाईबासा, चक्रधरपुर, चंदौली मझवार, चंद्रपुरा, छबड़ा गुगोर, चित्रकुट धाम कर्वी, चोपन, कडप्पा, दाहोद, डाल्टनगंज, दामनजोड़ी, दमोह, डांगोपोसी, ढेंकनाल, ढोली, धौलपुर, धुबरी, दुमका, फ़तेहपुर, फ़िरोज़पुर कैंट, गंगाघाट, गंजबासौदा, गढ़वा रोड, गढ़वा शहर, गौरीपुर, गया, घाटशिला, गिरिडीह, गोड्डा, गोविंदपुर रोड, गुना, गुनुपुर, गुरारू, हैदर नगर, हरिद्वार जंक्शन, हरिशंकर रोड, हरपालपुर, हटिया, हज़ारीबाग़ रोड, हिंडौन सिटी, जगदलपुर, जैसलमेर, जमुई, जनकपुर रोड, जपला, जेपोर, कांटाबांजी, करहागोला रोड, काशीपुर जंक्शन, कटिहार जंक्शन, केसिंगा, खगड़िया जंक्शन, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खरियार रोड, किच्छा, कोरापुट जंक्शन, कोरबा, लाभा, लखमीनिया, लातेहार, लिमखेड़ा, लोहरदगा, महासमुंद, महेशखूंट, मजबत, मानिकपुर जंक्शन, मनोहरपुर, मानसी जंक्शन, एमसीएस छतरपुर, गौरीपुर, गया, घाटशिला, गिरिडीह, गोड्डा, गोविंदपुर रोड, गुना, गुनुपुर, गुरारू, हैदर नगर, हरिद्वार जंक्शन, हरिशंकर रोड, हरपालपुर, हटिया, हज़ारीबाग़ रोड, हिंडौन सिटी, जगदलपुर, जैसलमेर, जमुई, जनकपुर रोड, जपला, जेपोर, कांटाबांजी, करहागोला रोड, काशीपुर जंक्शन, कटिहार जंक्शन, केसिंगा, खगड़िया जंक्शन, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खरियार रोड, किच्छा, कोरापुट जंक्शन, कोरबा, लाभा, लखमीनिया, लातेहार, लिमखेड़ा, लोहरदगा, महासमुंद, महेशखूंट, मजबत, मानिकपुर जंक्शन, मनोहरपुर, मानसी जंक्शन, एमसीएस छतरपुर, मेरामंडली, मोगा, मोतीपुर, मुहम्मद गंज, मुनिगुडा, मुरी जंक्शन, मुजफ्फरपुर जंक्शन, नबीनगर रोड, नगर उंटारी, नमकोम, नंदुरबार, नवादा, ओर्गा, उस्मानाबाद, पहाड़पुर, पाकुड़, परमक्कुडी, पारसनाथ, पारलाखेमुंडी, पार्वतीपुरम, पाठशाला, पिंडवाड़ा, पिस्का, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, रफीगंज, रायचूर जंक्शन, राजपलायम, राजमहल, राम दयालु नगर, रामनाथपुरम, रामदेवरा, रामेश्वरम, रामगढ़ कैंट, रांची जंक्शन, रायगढ़ा, रेनुकूट, रूड़की, रुठियाई, साहिबगंज, साहिबपुर कमाल, सलौना, सालमारी, श्री महावीरजी, सिद्धार्थ नगर, सिल्ली, सिमुलतला, सिंगरौली, सीतामढी, सोनभद्र, श्रीविल्लीपुत्तूर, टांगला, टाटानगर, टाटीसिलवाई, टिटलागढ़ जंक्शन, तुलसीपुर, उदलगुड़ी, विदिशा, विरुधुनगर, व्यासनगर, वडसा, वाशिम, यादगी, श्रीरंगम, श्रीविल्लीपुत्तूर, सेंट थॉमस माउंट, सुल्लुरपेटा, सुरैमनपुर, स्वामीनारायण छपिया, तालचेर, तामलुक, टनकपुर, थालास्सेरी, थावे, तिरुवरूर जंक्शन, तिरुवन्नामलाई, त्रिपुनिथुरा, तुनि, उदगमंडलम, उझानी, उरकुरा, उतरन, वडकारा, वडाला रोड, विदिशा, विंध्याचल, वृद्धाचलम जंक्शन, वडकनचेरी, वारंगल स्टेशनों पर नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है।
अन्य स्टेशनों पर भी विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं तथा कुछ स्टेशनों की प्रगति के के तहत बोकारो स्टील सिटी स्टेशनः स्टेशन भवन का सुधार, प्लेटफार्म संख्या 1 का प्लेटफॉर्म निर्माण, नया प्रतीक्षा कक्ष, विश्राम कक्ष, पार्किंग, संपर्क मार्ग, प्रवेश/निकास द्वार, चारदीवारी, प्लेटफार्म संख्या 1 पर दिव्यांगजनों के लिए स्पर्शनीय मार्ग और प्लेटफार्म संख्या 2 पर दिव्यांगजन शौचालय का सुधार कार्य पूर्ण हो चुका है। प्लेटफार्म संख्या 2/3 और एस्केलेटर का कार्य शुरू हो चुका है। वापी स्टेशनः वापी स्टेशन पर विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। प्लेटफार्म संख्या 1 और प्लेटफार्म संख्या 2/3 पर प्लेटफॉर्म शेल्टर का विस्तार, एसी प्रतीक्षा कक्ष में नया शौचालय ब्लॉक, आवागमन क्षेत्र, पार्किंग और पुराने फुट ओवर ब्रिज को हटाने का कार्य पूर्ण हो चुका है। 12 मीटर फुट ओवर ब्रिज का कार्य शुरू हो चुका है। तंजावुर जंक्शन स्टेशनः पोर्टिको, कॉनकोर्स का सुधार, प्लेटफॉर्म शेल्टर, बुकिंग कार्यालय का सुधार, सर्कुलेटिंग एरिया, एग्जिट आर्च और साइनबोर्ड का काम पूरा हो चुका है। पार्किंग, लिफ्ट, एस्केलेटर, कोच इंडिकेशन बोर्ड और ट्रेन इंडिकेशन बोर्ड का काम शुरू हो चुका है। जलपाईगुड़ी स्टेशनः प्लेटफॉर्म नंबर 1 के विस्तार और प्लेटफॉर्म की सतह बनाने का काम, प्लेटफॉर्म शेल्टर, बाउंड्री वॉल और 12 मीटर फुट ओवर ब्रिज का काम पूरा हो चुका है। सर्कुलेटिंग एरिया, लिफ्ट और एस्केलेटर का काम शुरू हो चुका है। तिरुपति स्टेशनः दक्षिण दिशा में नए दूसरे प्रवेश द्वार स्टेशन भवन, 2 एयर कॉनकोर्स और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का ढांचा तैयार हो चुका है। दक्षिण दिशा में नए दूसरे प्रवेश द्वार स्टेशन भवन और एयर कॉनकोर्स का फिनिशिंग का काम, उत्तर दिशा में स्टेशन भवन का ढांचा, प्लेटफॉर्म शेल्टर, लिफ्ट, एस्केलेटर आदि का काम शुरू हो चुका है।
भुवनेश्वर स्टेशनः पूर्व और पश्चिम दिशा में नए स्टेशन भवन और एयर कॉनकोर्स का ढांचा तैयार हो चुका है। पूर्वी और पश्चिमी स्टेशन पर एलिवेटेड ड्राइववेए फुट ओवर ब्रिज का विस्तार और प्लेटफॉर्म शेल्टर के संरचनात्मक कार्य शुरू हो चुके हैं। पूर्वी और पश्चिमी स्टेशन पर नए स्टेशन भवन के अंतिम रूप देने का कार्य, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग एमईपी, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग एचवीएसी और एस्केलेटर का कार्य भी शुरू हो चुका है। पीपीपी मॉडलः मध्य प्रदेश का रानी कमलापति स्टेशन पीपीपी मॉडल के तहत विकसित और चालू किया जा चुका है। पीपीपी मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए चिन्हित 15 स्टेशनों में से विजयवाड़ा स्टेशन के पुनर्विकास के लिए निविदा आमंत्रित की जा चुकी है। अन्य 14 स्टेशन मास्टर प्लानिंग और वित्तीय मॉडलिंग के विभिन्न चरणों में हैं।
वाई-फाई सेवाएंः भारतीय रेलवे के लगभग सभी रेलवे स्टेशनों पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा 4 जी, 5 जी कवरेज उपलब्ध है। यात्री डेटा कनेक्टिविटी के लिए भी इन नेटवर्कों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यात्रा अनुभव बेहतर हो रहा है। इसके अलावा, 6117 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। हरित एवं पर्यावरण अनुकूल रेलवेः भारतीय रेलवे स्टेशन संचालन में अपशिष्ट प्रबंधन, जिसमें उसका निपटान और पृथक्करण, जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता शामिल है, को उच्च प्राथमिकता देता है। रेलवे ट्रैक पर मल-मूत्र गिरने से रोकने के लिए सभी यात्री डिब्बों में जीरो डिस्चार्ज बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं। बायो टॉयलेट की व्यवस्था के तहत 2004-2014 की अवधि में 9,587 तथा 2014 से फरवरी 2026 तक की अवधि में 3,66,250 बायो टॉयलेट की व्यवस्था की गई।
भारतीय रेलवे ने गैर-ट्रैक्शन रेल मार्गों पर ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें ऊर्जा दक्षता से संबंधित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे कि सेंसर आधारित और टाइमर नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था का व्यापक उपयोग, ट्रेन की आवाजाही से जुड़े सर्किट पृथक्करण के माध्यम से स्वचालित रूप से 30 प्रतिशत-70 प्रतिशत प्लेटफॉर्म प्रकाश व्यवस्था। इसके अतिरिक्त, भारतीय रेलवे ने अपने कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों और आवासीय कॉलोनियों में 100 प्रतिशत एलईडी प्रकाश व्यवस्था स्थापित कर ली है।

कोच निर्माण क्षमता में वृद्धि
आधुनिक ट्रेनों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्वदेशी कोच निर्माण क्षमता बढ़ाने हेतु भारतीय रेलवे ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं। महाराष्ट्र के लातूर में मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री एमआरसीएफ की स्थापना 685.79 करोड़ रुपये की लागत से की गई है। एमआरसीएफ, लातूर में प्रौद्योगिकी साझेदार के माध्यम से 120 वंदे भारत ट्रेनसेटों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। साथ ही, भारतीय रेलवे ने तेलंगाना के काजीपेट में 521.36 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे विनिर्माण इकाई की स्थापना का कार्य भी शुरू किया हैए जहां आधुनिक मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट का निर्माण करने की योजना है। काजीपेट स्थित रेल विनिर्माण इकाई का कार्य उन्नत चरण में है और सिविल और विद्युत अवसंरचना लगभग पूरी हो चुकी है। रेलवे की अपनी इकाइयों के अलावा, वर्तमान में बीईएमएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां भी वंदे भारत स्लीपर और एलएचबी जनरल/स्लीपर श्रेणी के कोचों आदि के निर्माण में लगी हुई हैं।
सुरक्षा प्रदर्शन में सुधार और ट्रेन दुर्घटनाओं में कमी
भारतीय रेलवे में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप, दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। वर्ष 2014-15 में 135, वर्ष 2025-26 में 25.03.2026 तक 15 (89 प्रतिशत की कमी)।
ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुधार दर्शाने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण सूचकांक परिणामी दुर्घटना सूचकांक है के तहत वर्ष 2014-15 में 0.11, 2024-25 में 0.03 (73 प्रतिशत की कमी) तथा 2025-26 (फरवरी 2026 तक) 0.01 एवं यह सूचकांक सभी ट्रेनों के कुल चलने वाले किलोमीटर के अनुपात के रूप में परिणामी दुर्घटनाओं की संख्या को मापता है। दुर्घटना सूचकांक-परिणामी दुर्घटनाओं की संख्या/ट्रेनों की संख्या गुणा मिलियन किलोमीटर। भारतीय रेलगाड़ियों पर होने वाली दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों में पटरी की खराबी, लोकोमोटिव/कोच की खराबी, उपकरण की विफलता, मानवीय त्रुटियाँ आदि शामिल हैं। भारतीय रेलगाड़ियों पर हुई परिणामी रेल दुर्घटनाओं और उनमें हताहतों (रेलवे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों सहित) का विवरण इस प्रकार से है, अवधि 2004-05 से 2013-14 में रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1,711, दुर्घटनाएँ मृत्यु की संख्या 904, घायलों की संख्या 3,155 व 2014-15 से 2023-24 तक रेल दुर्घटनाओं की संख्या 678, दुर्घटनाएँ मृत्यु की संख्या 748, घायलों की संख्या 2,087 एवं 2024-25 रेल दुर्घटनाओं की संख्या 31, दुर्घटनाएँ मृत्यु की संख्या 18,  घायलों की संख्या 92 तथा 2025-26 में (25 मार्च 2026 तक) रेल दुर्घटनाओं की संख्या 15, दुर्घटनाएँ मृत्यु की संख्या 16, रही।
जेडआर 7, चालू की गई जीसीटी ट्रेनें 18, आगे आईपीए जारी किए गए 07 तथा 14 करोड़। ईसीआर में 12 व 11, ईसीओआर में 06 व 22, एन.आर. में 12 व 22, एनसीआर में 05 0 11, एन ई आर में 04 व 4, एनएफआर में 03 व 8, एनडब्ल्यूआर में 08 व 15, एसआर में 03 व 09, एससीआर में 14 व 24, एसईआर में 09 व 19, एसईसीआर 12 व 69, एसडब्ल्यूआर में 03 व 15, डब्ल्यूआर में 14 व 20, डब्ल्यूसीआर में 04 व 11, डीएफसी में 05 व 128 तथा 292 गति शक्ति मल्टी-मोडल टर्मिनल (जीसीटी) योजना के तहत अब तक 128 जीसीटी चालू किए जा चुके हैं, जिनकी अनुमानित माल ढुलाई क्षमता 204 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है। इस नीति के तहत चालू किए गए 128 जीसीटी से लगभग 9183 करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया है।
संविदा कर्मचारियों का कल्याण
भारतीय रेलवे अपने विभिन्न विभागों जैसे यांत्रिकए वाणिज्यिक, विद्युत, सिविल इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार, चिकित्सा आदि से संबंधित स्टेशनों, कोचों, वैगनों, कोचिंग डिपो, लोकोमोटिव, पटरियों आदि सहित अपनी विभिन्न संपत्तियों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करता है। ये कार्य विभागीय रूप से औरध्या आउटसोर्सिंग के माध्यम से किए जाते हैं।
प्रमुख नियोक्ता के रूप में रेलवे यह सुनिश्चित करता है कि आउटसोर्स किए गए श्रमिकों को श्रम कानूनों के प्रावधानों के अनुसार एजेंसियों द्वारा सुविधाएं प्रदान की जाएं और संविदा श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत केंद्र/राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी तथा ईपीएफ एवं एमपी अधिनियम, 1952 का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन रेलवे द्वारा किए गए समझौतों में शामिल शर्तों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है। उपरोक्त कानूनों के उल्लंघन के मामलों से निपटने के लिए, मौजूदा कानूनों और दिशा-निर्देशों के अनुसार उपयुक्त दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं। वेतन के विलंबित भुगतान/भुगतान न होने की शिकायतों पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाती है और आउटसोर्सिंग एजेंसी के खिलाफ आवश्यकतानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
इसके अलावा, संविदात्मक दायित्वों की प्रभावी निगरानी के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यापक उपाय किए गए हैं। इनमें श्रमिक कल्याण पोर्टल पर श्रमिकों के विवरण का अनिवार्य पंजीकरण, वैधानिक अनुपालनों का कड़ाई से पालन, संविदा श्रमिकों की मनमानी बर्खास्तगी से सुरक्षा, किसी भी उल्लंघन का पता चलने पर दंड लगाना, श्रमिक जागरूकता शिविरों का आयोजन और शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए समर्पित शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना शामिल है।
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में दी। 


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