उदयपुर/भीलवाड़ा।
जब शब्द इबादत बन जाएं और ग़ज़ल जीवन की आवाज़—तभी जन्म लेते हैं ऐसे रचनाकार, जो महफ़िलों की रूह और साहित्य का आधार बन जाते हैं। ऐसे ही एक विलक्षण व्यक्तित्व Dr. Avadhesh Kumar Johri को 8 अप्रैल को ‘शायराना उदयपुर शिखर सम्मान 2025’ से अलंकृत किया जाएगा।
यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस साधना की पहचान है जो वर्षों से हिंदी साहित्य को समर्पित है।
🖋️ शायराना उदयपुर: दिलों का संगम
पिछले 15 वर्षों से उदयपुर की फिज़ाओं में अदब और एहसास घोलने वाला Shayarana Udaipur आज एक सशक्त साहित्यिक परिवार बन चुका है।
यह मंच…
• सीमाओं को मिटाता है — जाति, धर्म, उम्र सब गौण
• विविधता को जोड़ता है — डॉक्टर से छात्र तक, सब एक मंच
• कविता को जीता है — यहाँ शब्द सिर्फ लिखे नहीं, महसूस किए जाते हैं
🎓 डॉ. जौहरी: शब्दों के शिल्पकार
Government Girls College Mandal में अध्यापन कर रहे डॉ. जौहरी की पहचान बहुआयामी है—
📚 अकादमिक ऊँचाई
11 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन और 15 पुस्तकों का लेखन—उनकी गहराई को दर्शाता है।
🎤 मंच संचालन की कला
150+ कार्यक्रमों का संचालन—जहाँ उनकी आवाज़ महफ़िल को एक सूत्र में पिरो देती है।
🌐 डिजिटल सेतु
सोशल मीडिया के माध्यम से ‘हिंदी की दशा और दिशा’ पर संवाद—नई और पुरानी पीढ़ी के बीच पुल।
🌟 क्यों खास है यह सम्मान?
यह केवल एक सम्मान नहीं—
यह भीलवाड़ा की प्रतिभा और उदयपुर की संस्कृति का संगम है।
यह उस हिंदी भाषा का उत्सव है, जो हमें जोड़ती है…
और उन युवाओं के लिए प्रेरणा, जो अपनी कलम से खामोशी में क्रांति लिख रहे हैं।
💫 “जब ग़ज़ल के मिसरों में रूह उतर आए,
तब ही कोई ‘अवधेश’ बनता है…”
8 अप्रैल—एक दिन, जो राजस्थान के साहित्यिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा… 🖤
साभार :
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