भक्ति, सेवा और संस्कृति का संगम: उदयपुर के समीप विकसित हो रहा अनूठा परिसर

( 667 बार पढ़ी गयी)
Published on : 08 Apr, 26 17:04

आमजन से जुड़ने और सहयोग की अपील

 भक्ति, सेवा और संस्कृति का संगम: उदयपुर के समीप विकसित हो रहा अनूठा परिसर

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के समीप ईसवाल के सेलू ग्राम में मोयेंद्र फाउंडेशन की ओर से एक बहुआयामी और दूरदर्शी परियोजना विकसित की जा रही है, जो आने वाले समय में सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगी। इच्छुक व्यक्ति इस पुनीत एवं जनभागीदारी आधारित परियोजना में सहयोग हेतु 9829243207 पर संपर्क कर सकते हैं और इस महत्त्वपूर्ण सामाजिक पहल का हिस्सा बन सकते हैं।

यह प्रोजेक्ट केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसे समग्र वातावरण का निर्माण करना है, जहाँ भक्ति, सेवा, करुणा और कला एक साथ जीवंत रूप में अनुभव की जा सके।

इस प्रस्तावित परिसर में श्री राधा-कृष्ण का भव्य मंदिर, आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौशाला, ‘हैप्पी होम’ और भारतीय संगीत परंपरा को समर्पित एक विशिष्ट संगीत संग्रहालय विकसित किया जाएगा। यह समूचा प्रोजेक्ट एक ही स्थान पर विभिन्न मानवीय और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में एक अनूठी पहल है।

परियोजना के तहत निर्मित होने वाला राधा-कृष्ण मंदिर न केवल आस्था का केंद्र होगा, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख स्रोत भी बनेगा। मंदिर परिसर में नियमित पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक सकारात्मक और शांत वातावरण मिलेगा।

इसके साथ ही विकसित की जाने वाली गौशाला में निराश्रित एवं बेसहारा गायों के संरक्षण, पालन-पोषण और चिकित्सा सेवा की समुचित व्यवस्था की जाएगी, जो भारतीय संस्कृति में गौसेवा की परंपरा को सुदृढ़ करेगी।

इस प्रोजेक्ट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पक्ष हैप्पी होम है। यह केवल एक वृद्धाश्रम नहीं होगा, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक ऐसा स्नेहपूर्ण और सम्मानजनक आवास होगा, जहाँ वे परिवार जैसा वातावरण, मानसिक शांति और सामाजिक जुड़ाव अनुभव कर सकेंगे।

यहाँ बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य, मनोरंजन, आध्यात्मिक गतिविधियों और दैनिक जीवन की सभी आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिससे उनका जीवन सुखद और संतुलित बन सके।

परिसर में प्रस्तावित संगीत संग्रहालय इस परियोजना की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाएगा। इस संग्रहालय में भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत से जुड़े वाद्ययंत्रों, परंपराओं और इतिहास को संरक्षित और प्रदर्शित किया जाएगा।

यह न केवल कला प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।

10 बीघा दान की गई भूमि पर होंगे सब निर्माण

मोयेंद्र फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक एवं समाजसेवी कृष्णदासी रंजना भाटी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अपनी लगभग 10 बीघा (करीब 2.30 लाख वर्ग फीट) भूमि दान स्वरूप समर्पित की है। उन्होंने कहा कि यह उनका सामाजिक दायित्व है कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी विरासत छोड़ें, जहाँ सेवा, धर्म और करुणा का संगम हो।

फाउंडेशन के निदेशक मुकेश माधवानी ने बताया कि यह एक पीपल्स प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को इससे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं, जिनमें इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं और समाजसेवी अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार योगदान देकर सहभागी बन सकते हैं।

निदेशक दिवाकर अग्रवाल ने बताया कि यह परियोजना उदयपुर को एक नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जहाँ शहर केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और झीलों के लिए ही नहीं, बल्कि सेवा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के केंद्र के रूप में भी जाना जाएगा।

निदेशक विजय सराफ ने बताया कि देश-विदेश से उदयपुर आने वाले पर्यटक यहाँ केवल दर्शनीय स्थलों की तरह नहीं, बल्कि एक समग्र अनुभव प्राप्त करने के लिए आएंगे—जहाँ उन्हें गौसेवा, आध्यात्मिक शांति, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

परियोजना का डिजाइन आर्किटेक्ट सुनील लढ्ढा ने तैयार किया है। जिसमें पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली और आधुनिक सुविधाओं का संतुलित समावेश किया गया है। डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि परिसर का प्रत्येक भाग प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करे, जिससे यहाँ आने वाले लोगों को एक शांत, सुकूनदायक और प्रेरणादायक अनुभव मिल सके। 


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.