उदयपुर | जनमत मंच के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस के उपलक्ष में ऐतिहासिक जानकारी देते हुए अध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास महावर ने बताया कि 12 अप्रैल को प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य सतत विकास में अंतरिक्ष अन्वेषण के योगदान को बढ़ावा देना है।
1957 में, सोवियत संघ ने पहला मानव निर्मित उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। इस उपग्रह का नाम स्पुतनिक प्रथम था। चार साल बाद, एक और ऐतिहासिक घटना घटी। 12 अप्रैल, 1961 को यूरी गागारिन ने पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान भरी। गागारिन सोवियत नागरिक, पायलट और अंतरिक्ष यात्री थे। उनका अंतरिक्ष यान, वोस्तोक प्रथम, पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने वाला पहला यान था। पृथ्वी के चारों ओर उनकी यात्रा में 108 मिनट से अधिक का समय लगा। गागारिन की यात्रा अंतरिक्ष दौड़ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हई।
इस अवसर पर मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर, डॉ.प्रियदर्शी ओझा, विनोद कुमार चौधरी एवं डॉ. कुणाल आमेटा ने विषय पर प्रकाश डालते हुए जानकारी दी की अंतरिक्ष अन्वेषण के बिना, हमारे पास अंतरिक्ष में उपग्रह नहीं होते। ये उपग्रह संचार, सुरक्षा और नौवहन में सुधार करते हैं। उपग्रह मौसम विज्ञानियों को मौसम का पूर्वानुमान लगाने में भी मदद कर सकते हैं । आज के युग में अर्टिफिकल इंटेलिजेंस और जी. पी. एस एक उत्तम उदहारण है।
कई अंतरिक्ष संग्रहालय, विज्ञान केंद्र और स्कूल इस दिन अंतरिक्ष के बारे में सीखने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें विशेष प्रदर्शनियाँ, व्याख्यान और चर्चाएँ शामिल होती हैं कि कैसे अंतरिक्ष अन्वेषण मानव जाति को एकजुट कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरिक्ष युग की शुरुआत से ही संयुक्त राष्ट्र ने यह स्वीकार किया है कि बाह्य अंतरिक्ष मानवता के अस्तित्व में एक नया आयाम जोड़ता है। संयुक्त राष्ट्र परिवार समस्त मानव जाति की भलाई के लिए बाह्य अंतरिक्ष के अद्वितीय लाभों का उपयोग करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
12 अप्रैल 1961 को सोवियत नागरिक यूरी गागारिन द्वारा पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान भरी गई थी। इस ऐतिहासिक घटना ने समस्त मानव हित के लिए अंतरिक्ष अन्वेक्षण का मार्ग प्रशस्त किया।