उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अनुसंधान निदेशालय के अंतर्गत स्थित बारानी कृषि अनुसंधान केंद्र पर संचालित बारानी क्षेत्रों के लिए अखिल भारतीय समन्वित कृषि अनुसंधान परियोजना(AICRPDA) के अंतर्गत आईसीएआर–केंद्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRIDA) के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजस्थान के राजसमंद जिले के लापसिया ग्राम निवासी प्रगतिशील किसान श्री हुक्मी चंद गाड़री को उनकी उत्कृष्ट कृषि तकनीकों के लिए ‘बेस्ट फार्मर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक (DG), ICRISAT, हैदराबाद एवं डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, ICAR-CRIDA द्वारा प्रदान किया गया।
श्री हुक्मी चंद गाड़री द्वारा अपनाई गई प्रमुख तकनीकों में इन-सीटू जल संरक्षण हेतु वाइब्रो-चिज़ल हल द्वारा उप-मृदा में कठोर परत (हार्ड पैन) को तोड़ना, परिधीय बंडिंग, ढाल के अनुरूप बुवाई, मक्का फसल में सूखे की स्थिति में 1.0 प्रतिशत घुलनशील एनपीके (18:18:18) का छिड़काव तथा चना-मक्का अंतरफसल प्रणाली को अपनाना शामिल है। इन तकनीकों के माध्यम से जल संरक्षण, फसल उत्पादकता एवं किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस उपलब्धि पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार कृषि क्षेत्र में सतत विकास को नई दिशा देते हैं तथा विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित करते हैं।
अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन एवं किसानों की मेहनत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो कृषि अनुसंधान की उपयोगिता सिद्ध करती है। क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.एस. लखावत ने अपने संदेश में इसे बारानी कृषि क्षेत्र में नवाचार का प्रेरणादायक उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सफलताएं अन्य किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
अंत में कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह, अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविंद कुमार वर्मा एवं क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.एस. लखावत ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि एवं ‘बेस्ट फार्मर अवॉर्ड’ प्राप्त करने पर बारानी कृषि अनुसंधान केंद्र, आरजिया, भीलवाड़ा के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार छाता, प्रोजेक्ट इंचार्ज(AICRPDA एवं NICRA) डॉ. के.सी. नागर एवं वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता श्री मयंक गोयल को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
यह सम्मान न केवल श्री गाड़री की मेहनत और नवाचार का प्रमाण है, बल्कि बारानी कृषि के क्षेत्र में उन्नत तकनीकों के प्रसार एवं किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हुआ है।