संघ नहीं समाज बड़ा बने यह संघ का उद्देश्य – डॉ धर्मेंद्र सिंह

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Published on : 13 Apr, 26 13:04

स्वयंसेवी संस्थाएं ही सेवा कार्यों की मजबूत आधारशिला : डॉ. धर्मेंद्र सिंह

संघ नहीं समाज बड़ा बने यह संघ का उद्देश्य – डॉ धर्मेंद्र सिंह

उदयपुर। हिन्दू समाज का इतिहास सर्वसमावेशी और अत्यंत गौरवशाली रहा है, जिसे समय-समय पर अनेक चुनौतियों के बावजूद कोई भी शक्ति समाप्त नहीं कर सकी। यह संस्कृति अपने मूल्यों, विचारों और जीवनदृष्टि के कारण आज भी विश्व में प्रासंगिक बनी हुई है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उदयपुर महानगर द्वारा सेवा भारती चिकित्सालय में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म संसद में अपने उद्बोधन के माध्यम से विश्व को भारतीय संस्कृति और हिन्दू दर्शन से परिचित कराया, जिससे भारत की आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिली।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में प्रमुख स्थान रखने वाले महानुभाव विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए समाज जागरण के अनेक प्रेरणादायी कार्य करते हैं और समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। ऐसे सभी प्रमुख जनों के विचार, अनुभव और प्रेरणाएं एक-दूसरे तक पहुंचें, इसी उद्देश्य से प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया जाता है, ताकि संवाद के माध्यम से करणीय-अकरणीय विषयों पर सहमति बनाकर श्रेष्ठ समाज और वैभवशाली राष्ट्र के निर्माण में सामूहिक रूप से सेवा कार्य किए जा सकें।
समाज में मातृ शक्ति के सम्मान और सुरक्षा को अत्यंत आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को दैवी स्वरूप माना गया है। जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं ईश्वर की कृपा बनी रहती है, इसलिए इस भाव को समाज में और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है।

उन्होंने संघ की लगभग सौ वर्षों की यात्रा का वर्णन करते हुए डॉ. हेडगेवार के बाल्यकाल से देशभक्ति भाव, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान, संघ की स्थापना तथा विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों सहित राम मंदिर आंदोलन जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए।

संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि गृह संपर्क अभियान, सामाजिक सद्भाव बैठक, हिंदू सम्मेलन एवं प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन नगर और खंड स्तर पर किया जा रहा है, जिनमें समाज की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिल रही है।

गोष्ठी में बड़ी संख्या में स्वयंसेवी संस्थाओं ने सहभागिता की, जो शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, अन्न क्षेत्र तथा लावारिस मृतकों की अंत्येष्टि एवं अस्थि विसर्जन जैसे विभिन्न सेवा कार्यों में सक्रिय हैं। इस दौरान संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यों की जानकारी भी साझा की।

डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, नागरिक शिष्टाचार एवं पर्यावरण संरक्षण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक चिकित्सा, शिक्षा एवं आवश्यक संसाधन पहुंचाकर उसे आत्मनिर्भर बनाना ही सच्चे अर्थों में सेवा है और यही इस गोष्ठी का मूल उद्देश्य है।

विषय प्रतिपादन के पश्चात संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें उपस्थित प्रतिनिधियों ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का शुभारंभ भारत माता के पूजन एवं वंदे मातरम् के साथ हुआ तथा समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।


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