छह महीनों में बदलाव की मिसाल: प्रो. सारस्वत ने तोड़ा कार्यवाहक कुलगुरु का मिथक

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Published on : 14 Apr, 26 11:04

छह महीनों में बदलाव की मिसाल: प्रो. सारस्वत ने तोड़ा कार्यवाहक कुलगुरु का मिथक

उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलगुरु के रूप में प्रो. बी. पी. सारस्वत ने मात्र छह महीनों में यह साबित कर दिया कि पद अस्थायी हो सकता है, लेकिन निर्णय और नेतृत्व स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं।

14 अक्टूबर 2025 को अतिरिक्त कार्यभार संभालते हुए, कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सारस्वत को विश्वविद्यालय में प्रशासनिक संतुलन और शैक्षणिक सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई। पूर्व कार्यकाल के विवादों के बाद विश्वविद्यालय को नई दिशा देने की चुनौती उन्होंने स्वीकार की और उसे अवसर में बदल दिया।

अपने अनुभव और टीम वर्क के साथ उन्होंने लंबित व्यवस्थाओं को गति दी। प्रबंध मंडल की महीनों से लंबित बैठक आयोजित कर बजट पारित करवाया और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए। अकादमिक परिषद और अधिष्ठाता परिषद की नियमित बैठकों से विश्वविद्यालय में नवाचार और सुधार की प्रक्रिया को मजबूत किया गया।

विद्यार्थियों के हित में बड़े फैसले लेते हुए उन्होंने परीक्षा आवेदन की हार्ड कॉपी जमा करने की बाध्यता समाप्त की। साथ ही अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को अंकतालिका के साथ माइग्रेशन और प्रोविजनल प्रमाण पत्र देने तथा सभी दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन आवेदन और घर बैठे प्राप्त करने की सुविधा शुरू की।

शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़ी कैरियर एडवांसमेंट स्कीम की दो वर्षों से अटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। वहीं अशैक्षणिक कर्मचारियों की लंबित पदोन्नतियां मात्र 15 दिनों में पूरी कर आदेश जारी किए गए।

शोधार्थियों की करीब 200 लंबित फाइलों पर त्वरित निर्णय लिए गए। दिसंबर 2025 में 33वां दीक्षांत समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। परीक्षा समय पर कराने और परिणाम समय पर जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

विशेष रूप से, विश्वविद्यालय ने अन्य राज्य विश्वविद्यालयों से पहले प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर 1 जुलाई से शिक्षण कार्य प्रारंभ करने का निर्णय लिया, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

प्रो. सारस्वत का यह कार्यकाल इस बात का उदाहरण बन गया है कि कार्यवाहक कुलगुरु भी दूरदर्शिता, इच्छाशक्ति और प्रभावी नेतृत्व से संस्थान में बड़ा बदलाव ला सकता है।


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