उदयपुर ,राजस्थान में नगरीकरण के भौगोलिक अध्ययन के प्रणेता के रूप में प्रतिष्ठित जाने माने भूगोलवेत्ता मोहन लाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के अध्यक्ष रहे डॉ. राजमल लोढ़ा का उदयपुर में रविवार सुबह देहावसान हो गया | डॉ. लोढ़ा प्रो भट्टाचार्य, प्रो एन एल गुप्ता , , प्रो दिनेश भारद्वाज, प्रो आर एन व्यास, प्रो आर एस राठौर की पीढ़ी के ऐसे भूगोलविद थे जिन्होंने अपने अध्यापन , शोध और समर्पित सेवा से विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग को नै उंचाई प्रदान की | चित्तोडगढ़ जिले के भदेसर गाँव से निकलकर उन्होंने उच्च शिक्षा में अपना मुकाम बनाया और लगभग छब्बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन किया | उन्होंने तेरह शोध प्रकल्प पूरे किये और अपने शोध प्रबंध भीलवाड़ा के नगरीकरण के द्वारा राजस्थान में नगरीकरण के भौगोलिक अध्ययन के प्रणेता के रूप में अपना स्थान बनाया | उनकी अकादमिक सक्रियता में कोई कमी नहीं थी | कुछ ही वर्षों पूर्व उन्होंने अपनी आत्मकथा “ झोंपड़ी से बंगले तक” का प्रकाशन किया एवं एक भव्य कार्यक्रम में उस पुस्तक का लोकार्पण महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो एस एल मेहता ने किया था |उनके अनेक शोध छात्र अनेक विश्वविद्यालयों में प्रोफ़ेसर बने और उनकी परंपरा को आगे बढाया | उनके विद्यार्थी राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो दीपक महेश्वरी, प्रो एल आर पटेल, डॉ चन्द्र देव ओला, विख्यात भूगोलवेत्ता प्रो पी आर व्यास, बी एल जनवाएवं प्रो हेमेन्द्र चण्डालिया ने उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि दी है |