कुम्भलगढ़ में विश्व धरोहर दिवस पर भव्य आयोजन

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Published on : 21 Apr, 26 07:04

नाटिकाओं और जनभागीदारी से गूंजा विरासत संरक्षण का संदेश

कुम्भलगढ़ में विश्व धरोहर दिवस पर भव्य आयोजन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जोधपुर मंडल द्वारा 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर मेवाड़ के गौरवशाली अजेय दुर्ग कुम्भलगढ़ किला में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। ऐतिहासिक भव्यता और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण इस आयोजन ने उपस्थित जनसमूह को भारतीय विरासत के महत्व से गहराई से जोड़ दिया।

इस अवसर पर उदयपुर की मार्तंड फाउंडेशन टीम को दो प्रभावशाली नाटिकाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिला। अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. इज़हार आलम हाशमी के मार्गदर्शन में “विरासत ही पहचान हमारी” तथा “अनमोल विरासत – हमारी पांडुलिपियां” विषयों पर नाटिकाएं तैयार की गईं। सहायक मनोज द्विवेदी द्वारा उपलब्ध कराए गए कॉन्सेप्ट नोट के आधार पर सीमित समय में सशक्त पटकथा तैयार कर पूर्वाभ्यास किया गया।


कार्यक्रम स्थल बादल महल के नीचे स्थित प्रांगण में उत्सव का जीवंत वातावरण दिखाई दिया। स्थानीय राजकीय विद्यालय, आरेट गांव के विद्यार्थियों ने हेरिटेज वॉक करते हुए तिरंगा हाथ में लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिससे देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राजसमंद की एसडीएम साक्षी पुरी ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए सांस्कृतिक सूचना पट्ट का अनावरण, कुम्भलगढ़ ब्रोशर का विमोचन तथा देशभर की 44 विश्व धरोहर स्थलों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

एएसआई अधिकारियों द्वारा भारत की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक धरोहरों की विशेषताओं का विस्तृत वर्णन किया गया, जिनके कारण यूनेस्को द्वारा इन्हें विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त हुआ है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य आमजन में विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वच्छता एवं संरक्षण में सहभागिता सुनिश्चित करना रहा। इसी क्रम में अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. हाशमी द्वारा उपस्थित समुदाय को विरासत संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। साथ ही बच्चों के लिए एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जोधपुर से आई चित्रकार कोमल विजय शुक्ला ने बच्चों को पुरातात्विक मूर्तियों के चित्रांकन एवं रंग संयोजन की बारीकियां सिखाईं।


मार्तंड फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत पहली नाटिका “विरासत ही पहचान हमारी” ने हास्य और संवादों के माध्यम से दर्शकों को खूब आनंदित किया, साथ ही विरासत संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। नाटिका के गीत—“ये अमूल्य विरासत है किसकी? हम सबकी…”—ने पूरे वातावरण को सामूहिक चेतना से भर दिया। दूसरी नाटिका “अनमोल विरासत – हमारी पांडुलिपियां” ने चुटीले संवादों और प्रेरणादायी गीतों के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटिकाओं में मनीष शर्मा, किरण जानवे और अमित मेनारिया ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया, वहीं दुष्यंत सिंह बारठ ने अपने मधुर संगीत से कार्यक्रम को सुरमय बनाया। कार्यक्रम में प्रो. मंगेश शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने आयोजन की सराहना की। स्थानीय शिक्षक कुबेर सिंह ने भी सहभागिता निभाते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन एएसआई टीम के रामनिवास द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया।

समापन में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रयास सराहनीय हैं, किन्तु हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए जनसामान्य, विशेषकर बच्चों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। विरासत संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर ही हम अपनी पहचान और गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचा सकते हैं।

— विलास जानवे


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