उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चिकित्सको ने एक 72 बर्षीय महिला की छाती से 18 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर निकालकर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि आर्थिक स्थिति को देखते हुए बेहद कम खर्च में बोन सीमेंट के जरिए उसकी हड्डियों का ढांचा भी पुननिर्माण कर दिया। इस सफल ऑपरेशन में कैन्सर रोग सर्जन डॉ.सौरभ शर्मा, सीटीसीएस सर्जन डॉ.अनुज मेहता,निश्चेतना विभाग के डॉ.प्रकाश औदिच्य,डॉ.समीर गोयल,डॉ.कृष्णगोपाल,नितेश, कुलदीप एवं टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
दरअसल बॉसवाड़ा के घाटोल निवासी 72 बर्षीय महिला मरीज जब अस्पताल आई, तो उसकी स्थिति काफी गंभीर थी। छाती के मध्य भाग में एक बड़ी गाँठ थी। मरीज का पहले भी एक अन्य अस्पताल में ऑपरेशन हो चुका था, लेकिन बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई और ट्यूमर दोबारा बढ़ गया। हड्डियों के कुल कैंसर के मामलों में स्टरनम कैंसर केवल 1-2 प्रतिशत में मरीजों में ही पाया जाता है, जो इसे बेहद दुर्लभ बनाता है।
कैन्सर रोग सर्जन डॉ.सौरभ शर्मा ने बताया कि मरीज की बायोप्सी रिपोर्ट में सामने आया कि यह स्टरनम कैंसर है। साथ ही यह हृदय की झिल्ली और फेफड़ों तक फैला हुआ था। ऑपरेशन से पहले मरीज की सीटी स्कैन कराई तो रिपार्ट में ट्यूमर का आकार करीब 15 से 18 सेंटीमीटर था। यह ट्यूमर इतना आक्रामक था कि हृदय की बाहरी झिल्ली शरीर की मुख्य रक्त वाहिनियों और पसलियों से बुरी तरह चिपका हुआ था। जरा सी चूक मरीज की जान ले सकती थी।
डॉ.सौरभ ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर को निकालने के लिए छाती की हड्डी और पसलियों के प्रभावित हिस्से को काटना पड़ा। अब चुनौती यह थी कि छाती के खाली हिस्से को कैसे भरा जाए। मरीज की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए महंगे इम्प्लांट का खर्च उठाना मुश्किल था। ऐसे में हमने आधुनिक मेडिकल तकनीक और इंजीनियरिंग का सहारा लिया। हमने बोन सीमेंट और मेटैलिक प्लेट की मदद से मरीज की छाती की नई हड्डी तैयार की।
ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। यहाँ आईसीयू टीम के अथक प्रयासों और बेहतर केयर की वजह से मरीज ने तेजी से रिकवरी की। महज 2 दिन में मरीज को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया और ऑपरेशन के 6वें दिन वह पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई। परिजनों ने डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए इसे नया जीवन मिलना बताया है।
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का लक्ष्य है कि उच्च तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ समाज के हर वर्ग को कम से कम खर्च में मिल सके।