प्रदेश के 53 हजार स्कूलों में बदलेंगे मिड-डे-मील के बर्तन, छात्रों की संख्या के आधार पर मिलेगा बजट

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Published on : 22 Apr, 26 16:04

सियाराम शिक्षक संघ ने बजट आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाया , सभी स्कूलों को एक समान देने की मांग

बांसवाड़ा। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील (पीएम पोषण योजना) का भोजन अब नए और सुरक्षित बर्तनों में पकेगा जिसके बज़ट आवंटन कराए जाने हेतु प्रस्ताव मांगे गए हैं।जिस पर राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने राजस्थान भर के सभी स्कूलों को एक समान बजट आवंटन की मांग करते हुए विद्यार्थियो को सुरक्षित दोपहर भोजन योजना की भोजन शालाओं के मरम्मत, नवनिर्माण करवाने हेतु आवश्यक बजट की मांग की गई हैं 
सियाराम संगठन के प्रदेश मंत्री नानूराम डामोर ने बताया कि 
 राज्य सरकार ने प्रदेश के 53 हजार 738 विद्यालयों और मदरसों में पांच साल या उससे अधिक पुराने हो चुके किचन उपकरणों चूल्हे, बर्तन, कंटेनर आदि को बदलने की कवायद शुरू कर दी है।

जिला मंत्री महिपाल भुता ने बताया कि मिड-डे-मील कार्यक्रम आयुक्तालय की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (प्रारंभिक शिक्षा) को आदेश जारी कर दिए गए हैं। ओर स्थानीय अधिकारियों द्वारा सूचनाएं संकलित की जा रही हैं।
श्री भुता ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन के तहत यह रिप्लेसमेंट किया जा रहा है।

*नामांकन के आधार पर मिलेगा बजट*
*भेदभाव न्यायोचित नहीं*

जिला अध्यक्ष नवीन कुमार जोशी ने कहा कि सभी स्कूलों में नए बर्तन और किचन उपकरण खरीदने के लिए राशि का निर्धारण विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या के आधार पर नहीं किया गया है। 
एक पंचायत में आधी शालाओं को ही बज़ट आवंटन किया गया हैं। भेदभाव न्यायोचित नहीं होगा।

संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी श्रीपाल जैन ने बताया कि यह बजट 10 हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक तय किया गया है। 50 विद्यार्थियों तक प्रति स्कूल 10 हजार रुपए मिलेंगे। 51 से 150 विद्यार्थियों तक प्रति स्कूल 15 हजार, 151 से 250 विद्यार्थियों तक 20 हजार रुपए प्रति स्कूल तथा 251 और उससे अधिक विद्यार्थी वाले प्रति स्कूल को 25 हजार रुपए मिलेंगे।

*इन तीन श्रेणियों में हो सकेगी खरीद*

*भौगोलिक परिस्थितियों अलग और भामाशाहों की इस अंचल में कमी*

संगठन ने जनजाति टीएसपी परिक्षेत्रों में सरकारी स्कूलों को अधिक बजट की मांग करते हुए कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों और भामाशाहों की इस अंचल में कमी है ।

स्वीकृत राशि की सीमा में रहते हुए स्कूल अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार तीन मदों में से उपकरण खरीद सकेंगे। 

इसमें कुकिंग डिवाइस में खाना पकाने के उपकरण जैसे- स्टोव, गैस चूल्हा आदि। 

कंटेनर यानी अनाज और अन्य खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए डब्बे या टंकियां। खाना पकाने और बच्चों को परोसने के लिए आवश्यक बर्तन जैसे थाली, कटोरी, भगोने आदि।

*अधिकारियों से कहा 2 दिन में भेजें प्रस्ताव*

आयुक्तालय ने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पाबंद किया गया है कि वे अनुमोदित सूची वाले विद्यालयों से उनकी अति-आवश्यकता के आधार पर डिमांड भेजे।

 यह मांग पत्र हर हाल में दो दिन के भीतर आयुक्तालय को भिजवाना सुनिश्चित करना होगा, ताकि बजट जारी कर अग्रिम कार्यवाही की जा सके।

*बांसवाड़ा की 525 से अधिक स्कूल*

प्रदेश की ओर से जारी 53 हजार 738 विद्यालयों और मदरसों की सूची में बांसवाड़ा जिले की 525 से अधिक विद्यालय शामिल है। किन्तु अधिकतर विद्यालय को नजर अंदाज़ करते हुए बज़ट आवंटन नहीं किया गया हैं।

इन बज़ट आवंटन स्कूलों में नामांकन के आधार पर प्रस्ताव बनाकार भेजने होंगे।

माँग पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रदेश सभाध्यक्ष ललित आर पाटीदार,अमृत लाल डामोर, अरुण व्यास शामिल हैं।
 


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