पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में मनाया गया विश्व पृथ्वी दिवस

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Published on : 22 Apr, 26 18:04

पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में मनाया गया विश्व पृथ्वी दिवस

उदयपुर। राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में 56वीं विश्व पृथ्वी दिवस मनाया गया। संस्थान के उपनिदेशक डॉ. द्वारका प्रसाद गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष की थीम “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह को आधार मानकर पशुपालन के माध्यम से कैसे पृथ्वी की सेहत सुधारी जाए विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम प्लास्टिक प्रदूषण कम करने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सामुदायिक जिम्मेदारी पर केन्द्रित है।
उपनिदेशक डॉ. गुप्ता ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि इस वर्ष की थीम के परिप्रेक्ष्य में पशुपालन को प्राकृतिक परिवेश में किया जाना पृथ्वी को स्वास्थयप्रद बनाता है। प्लास्टिक ते मुक्ति पशुओं की प्लास्टिक खाने से मृत्यु दर में कमी लाएगी और इसके फलस्वरूप उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं गोबर की खाद के रूप में उपयोग से रासायनिक खाद का चलन कम होगा, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी साथ ही गोबर की ऑर्गेनिक खाद से मनुष्य और पशु भी स्वस्थ रहेगें। यही दूसरी ओर चारागाह की रक्षा व जंगल बचाने से पशुओं के लिए चारा उपलब्धता बढ़गी तो पृथ्वी पर कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। जल की रक्षा करने से प्राणी मात्र व प्रकृति की रक्षा होगी।
डॉ. पदमा मील वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि इस वर्ष की थीम के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को मूल मंत्र देना है कि छोटे छोटे कदम उठाकर भी पृथ्वी को बताया जा सकता है। जैसे ब्रश करते समय या शेविंग करते समय नल खुला नहीं छोडना, भोजन बबांद नहीं करमा, कागज का समुचित उपयाग करना, अनावश्यक इसपिटुवा उपकरणों का उपयोग नहीं करना प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करना, नवीनकरणीय उर्जा सॉलर आदि का उपयोग बढ़ाना जार धोने या नहाते समय पानी का दुरूपयांन रोकना छोटे छोटे कामा के लिए कपड़े की शैली वा उपयाग ऐसी आदि का कम उपयोग, पड़ा की रक्षा करना पौधारोपण आदि।
वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी  डॉ. ओमप्रकाश साहू, ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि वर्तमान स्थिति में पर्यावरणीय असंतुलन सबसे बड़ी चुनौती है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में बदलाव, बढ़ता प्रदुषण, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पृथ्वी पर सबसे बड़ा खतरा है। लगातार पृथ्वी पर विकास के नाम पर विनाश के कारण पेड़ पौधों व जीव जन्तुओं की लाखों प्रजातिया खत्म हो चुकी है या खत्म होने के कगार पर है।
संस्थान की डॉ. ममता सोनी वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि संस्थान के विद्यार्थियों ने शपथ लेकर संकल्प लेकर व दैनिक जीवन में छोटे छोटे कार्यों से प्रदूषण मुक्त, प्लास्टिक मुक्त, विश्व की कल्पना में सहयोग करेगें। पशुधन की रक्षा, जल व जंगल की रक्षा के माध्यम से पृथ्वी को बचाने में सहयोग करेंगें।
इस अवसर पर संस्थान के जूनियर असिस्टेंट विजय गरासिया सहित स्टाफ भी उपस्थित रहे। संस्थान के विद्यार्थी राघवेन्द्रसिह व त्याती शर्मा को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी का संचालन डॉ ओमप्रकाश साहू ने किया।


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