प्रदेश के 6785 स्कूल क्रमोन्नत, लेकिन पढ़ाने वाले ही नहीं

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Published on : 23 Apr, 26 18:04

दस साल से व्याख्याताओं का इंतजार

प्रदेश के 6785 स्कूल क्रमोन्नत, लेकिन पढ़ाने वाले ही नहीं

बांसवाड़ा। वाहवाही लूटने के लिए सरकार ने दस साल से प्रदेश के करीब 6785 माध्यमिक विद्यालय को विभिन्न संकाय में क्रमोन्नत किया गया हैं जिसमें से 3500 तो बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक (सीनियर सेकंडरी) में क्रमोन्नत तो कर दिया था किन्तु बिना विभागीय पद सृजित किए क्रमोन्नति से विद्यालय केवल शिक्षा के बाड़े बन कर रह गए हैं।

हर साल बच्चों को व्याख्याताओं का इंतजार रहता है कभी कभार पद स्थापन होता भी है किन्तु एक दो वर्ष में नियुक्ति प्राप्त कर वापस स्थानांतरण करा कर वापस चले जाने से स्कूल खाली ही रहते हैं।

*उपचारात्मक शिक्षण व्यवस्था का मानदेय चार साल बाद भी आधा बकाया*

 नियमानुसार राज्य सरकार को उपचारात्मक शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए किन्तु राज्य सरकार भी शिक्षकों के रिक्त पदों का पैसा बचाना चाहती है इस लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं देकर 
केवल क्रमोन्नति से वाहवाही लूट रही हैं उपचारात्मक शिक्षण व्यवस्था 2022 में हुई थी उसके बाद  विगत चार साल से कालांश आधारित उपचारात्मक शिक्षण व्यवस्था नहीं की गई है और 2022 में भी सेवानिवृत शिक्षकों से उपचारात्मक शिक्षण व्यवस्था की गई थी किन्तु मानदेय चार साल बाद भी आधा बकाया है।

रिक्त पदों के चलते ग्रामीणों जनप्रतिनिधियों अभिभावक में आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं क्योंकि एक ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा हैं वहीं स्कूलों में पद सृजित नहीं होने से पदस्थापन कैसे होगा और जहां पद सृजित भी है वहां पर पदस्थापन नहीं होने से पद खाली ही रहते हैं।

*काउंसलिंग में सभी रिक्त पदों को शामिल नहीं किया जाता*
राजस्थान शिक्षा विभाग में व्याख्याताओं के पदस्थापन सीधी भर्ती और पदोन्नति, ट्रान्सफर से भरे जाते हैं इस हेतु
राज्य स्तर पर काउंसलिंग होती है किन्तु टीएसपी परिक्षेत्र बांसवाड़ा के सभी स्कूलों में रिक्त पदों को प्रदर्शित ही नहीं किया जा कर भेदभाव किया जाता हैं जो कि न्यायोचित नहीं हैं ।

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने टीएसपी परिक्षेत्र बांसवाड़ा के सभी स्कूलों में रिक्त पदों को प्रदर्शित करने की मांग की है और राजस्थान सरकार को चेताया है कि शीघ्र ही समस्त विद्यालयों में गेस्ट फैकल्टी अथवा रिक्त पदों को भरने हेतु स्थानीय बेरोजगार युवाओं की अलग से टीएसपी परिक्षेत्र की विज्ञप्ति जारी नहीं की गई तो काकरी डुगरी जैसा वागड़ अंचल में आन्दोलन फ़िर से जोर पकड़ सकता है।

*तालाबंदी,हड़ताल का अंदेशा*

सियाराम संगठन ने ज्ञापन दे कर बताया कि रिक्त पदों के चलते आए दिन तालाबंदी ओर विद्यार्थियो की हड़ताल होती रहती हैं।
ज्ञापन में प्रदेश सभाध्यक्ष ललित आर पाटीदार एवम् अशोक शर्मा ने बताया कि 
 टीएसपी परिक्षेत्र में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था करना राजस्थान सरकार भूल गई हैं जिले में कई क्रमोन्नत विद्यालय में या तो पद सृजित नहीं है याफ़िर सृजित किए भी गए हैं तो काउंसलिंग में शामिल नहीं होने से खाली ही रहते है।
जिला अध्यक्ष नवीन जोशी और जिला मंत्री महिपाल भुता ने बताया कि हालात ये हैं कि कई क्रमोन्नत विद्यालय में विगत पांच वर्षों से  सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में एक भी प्रथम श्रेणी (व्याख्याता) और द्वितीय श्रेणी (वरिष्ठ अध्यापक) का शिक्षक नहीं लगाया गया है। 
प्रदेश मंत्री नानूराम डामोर ने बताया कि 11वीं और 12 वीं में पढ़ने वाली छात्र छात्राओं का भविष्य अब तृतीय श्रेणी (थर्ड ग्रेड) शिक्षकों के भरोसे छोड़ दिया गया है।उनसे जबरन 54 कालांश लेने का संस्था प्रधान दबाव बनाते है पीटीआई , पुस्तकालयध्यक्ष, पंचायत सहायक, प्रबोधक व्याख्याताओं का कार्य कर रहे है जबकि मानदेय तृतीय श्रेणी शिक्षकों का मिल रहा हैं।

*डीपीसी की सूची अटकी, फाइलों में दबी पदोन्नति*

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए पदोन्नति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जोकि सही भी है क्योंकि यथास्थान पदोन्नति देकर वाहवाही राज्य सरकार लुट रही है किन्तु व्याख्याताओं के पदस्थापन नहीं कर रही हैं।
एक साल से लम्बित प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य एवम् व्याख्याताओं के पदस्थापन नहीं हुए हैं।

 लेकिन, विडंबना यह है कि डीपीसी होने के बावजूद अब तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं होने से पदोन्नति सूची जारी नहीं करने से पदस्थापन नहीं हुए है। 

*काउंसलिंग अर्थ हीन प्रक्रिया*

जब तक सूची जारी कर काउंसलिंग नहीं होती और शिक्षकों को पोस्टिंग नहीं मिलती, तब तक क्रमोन्नयन का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

*इन कारणों से बिगड़े हालात*

स्कूलों को प्रमोट करने के आदेश तो निकाल दिए गए, लेकिन उन स्कूलों के लिए नए पदों (व्याख्याता व वरिष्ठ अध्यापक) का सृजन ही नहीं किया गया।

 वित्त विभाग से नए पदों के लिए बजट और वित्तीय स्वीकृति मिलने में अत्यधिक देरी हो रही है।

*बालिकाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़*

सरकार ने बिना किसी पूर्व योजना और पद सृजन के केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए6785 स्कूलों को दस साल में क्रमोन्नत किया गया हैं जिसमें 
3500 बालिका स्कूल भी शामिल हैं जिनको क्रमोन्नत कर दिया। यह बालिकाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। 

*जब स्कूलों में व्याख्याता और वरिष्ठ अध्यापक ही नहीं होंगे, तो उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा का क्या स्तर रह जाएगा? शिक्षा विभाग को तुरंत डीपीसी की सूची जारी करनी चाहिए और नए पदों का सृजन कर शिक्षकों की नियुक्ति करनी चाहिए, अन्यथा संगठन उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा*।
 


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