नई दिल्ली/इस वर्ष की पृथ्वी दिवस की थीम आवर प्लेनेट - आवर पॉवर है। लेकिन पृथ्वी को केवल एक “प्लैनेट” के रूप में नहीं, बल्कि “पृथ्वी माता” के रूप में देखा जाना चाहिए। इस दृष्टिकोण से ही सेवा व श्रद्धा भाव उत्पन्न होगा और यह धरती स्वस्थ , समृद्ध और आनंदमयी बनेगी । हमे शक्ति प्रदान करेगी
यह विचार विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य , पर्यावरण संरक्षण गतिविधि से जुड़े डॉ अनिल मेहता ने पृथ्वी दिवस पर भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की और से आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में व्यक्त किए।
डॉ मेहता ने कहा कि जब हम पृथ्वी को माता मानते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उसके प्रति संवेदनशीलता, कृतज्ञता और संरक्षण का भाव उत्पन्न होता है।
उन्होंने कहा कि बेतरतीब विकास एवं लालच से पृथ्वी का पिचहतर प्रतिशत हिस्सा खराब स्थिति में आ चुका है। विश्व जल दिवालियेपन की ओर बढ़ रहा है। प्राकृतिक स्रोतों झीलों, नदियों, पहाड़ों , समुद्रों , वनों का निरंतर क्षरण हो रहा है। विश्व स्तर पर औसतन यदि एक रुपया प्रकृति के संरक्षण पर खर्च हो रहा है तो इससे तीस गुना खर्च प्रकृति को खराब करने के कार्यों में हो रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “मिशन लाइफ", लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट का उल्लेख करते हुए
मेहता ने कहा कि “माइंडलेस कंजम्पशन” से हटकर “माइंडफुल और जिम्मेदार उपयोग” की ओर बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। व्यक्तिगत, व्यावसायिक और सार्वजनिक जीवन में संतुलित एवं पर्यावरण हितैषी व्यवहार अपनाना होगा।
हरित जीवनशैली का उल्लेख करते हुए मेहता ने प्लास्टिक मुक्त जीवन, भोजन की बर्बादी रोकने , केमिकल फ्री जीवनशैली, न्यूनतम एवं सोच-समझकर उपभोग, तथा पुनर्चक्रण जैसे उपायों को अपनाने की सलाह दी । हमारे दैनिक भोजन और वस्त्रों के निर्माण में भी भारी मात्रा में जल का उपयोग होता है, इसलिए “अन्न बचाओ – जल बचाओ” , तथा "कम खरीदों - ज्यादा दिन पहनो" जैसे गुणों को अपनाना होगा।
इस अवसर पर देश भर से जुड़े किशोरों एवं युवाओं ने अपने जीवन में हरित आदतों को शामिल करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की राष्ट्रीय निदेशक डॉ दर्शना पावस्कर ने पृथ्वी दिवस के उद्देश्यों पर जानकारी रखी।