यह वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम है जिसे "विश्व मलेरिया दिवस" के रूप में हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य है __उस घातक मच्छर जनित बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसके नियंत्रण व उन्मूलन के लिए वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा देना है। यह दिन मलेरिया से होने वाली मौतों को कम करने और इसके प्रसार को रोकने के प्रयासों को रेखांकित करता है, जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है इसमें संक्रमण करने वाला एक परजीवी प्लास्मोडियम परजीवी होता हैं । यह गंभीर, कभी-कभी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है।
मलेरिया के प्रकार __ये चार प्रकार के होते हैं __पी. फाल्सीपेरम , पी. विवैक्स, प्लास्मोडियम ओवेल और प्लास्मोडियम मलेरिया ।
मलेरिया बुखार के लक्षण __प्लास्मोडियम परजीवियों का जीवन चक्र जटिल होता है, जिसके कारण समय-समय पर ठंड लग कर बुखार आता है। इसमें लीवर खराब होने लगता हैं, भूख नहीं लगना उल्टियां होना आदि होती हैं। ज़्यादातर मरीज़ इलाज के बाद मलेरिया के लक्षणों से जल्दी ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर इलाज में देरी हो तो गंभीर जटिलताएं, जैसे कि गंभीर मलेरिया एनीमिया, सेरेब्रल मलेरिया, कोमा या मृत्यु भी हो सकती है।
विश्व मलेरिया दिवस का इतिहास__
अफ्रीका में "विश्व मलेरिया दिवस" पहली बार 2008 में मनाया गया था, जबकि "अफ्रीका मलेरिया दिवस" से विकसित हुआ था जिसे अफ्रीकी देश 2001 से मनाते आ रहे थे।
मलेरिया रोग की रोकथाम_मच्छरों के काटने के जोखिम को कम करने में निम्नलिखित उपाय सहायक हो सकते हैं_
1. शरीर पर 20-35% N, N-Diethyl-Meta-Toluamide युक्त कीट-नाशक लगाएं।
2. रात के समय बाहर रहने पर, लंबी आस्तीन वाले कपड़े और लंबी पैंट पहनें।
3. रात में सोते समय बिस्तर पर मच्छरदानी का उपयोग करें।
4. सोने से पहले अपने बेडरूम में पाइरेथ्रिन या उससे संबंधित किसी कीटनाशक का छिड़काव करें।
5. घर के आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें ।
6. पानी के टबों को हमेशा ढक्कन से ढककर रखें।
यूनानी चिकित्सा _इस जीर्ण मलेरिया को यूनानी चिकित्सा में "बुखार ए दकियान" कहते है, यूनानी चिकित्सा का उपयोग जहाँ लंबे समय से मलेरिया (प्लाज्मोडियम वायवेक्स ) का संक्रमण बना रहता है और अन्य दवाओं का असर कम हो रहा होता हैं तब इसका उपयोग किया जाता हैं।
इम्यूनिटी बढ़ाने पर ज़ोर __ यूनानी जड़ी-बूटियाँ मलेरिया के लक्षणों को कम करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं, जो रोग को दोबारा आने से रोक सकता है ।
यूनानी चिकित्सा में मलेरिया को ऐतिहासिक रूप से "दलदली हवा" या "मियास्मा" से उपजा माना जाता हैं इसके प्रबंधन में कुश्ता यानी भस्म और जड़ी-बूटियों का विशेष महत्व है । यूनानी चिकित्सा में पारंपरिक रूप से बुखार, ठंड, कमज़ोरी और शरीर के दर्द को कम करने के लिए प्राकृतिक उपचार पर जोर देते हैं। जैसे __
1. शरीर के तापमान को कम करने,
2. विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और
3. प्रतिरक्षा बढ़ाने पर केंद्रित है। इसमें हब्बे बुखर जैसी पारंपरिक जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है ।
4. यूनानी और पारंपरिक मलेरिया उपचार के प्रमुख उपाय__ (1)हब्बे बुखर __ यह एक प्रसिद्ध यूनानी दवा है जो बुखार और विशेष रूप से मलेरिया के कारण होने वाली कमजोरी में दी जाती है । (2). लार्जिन __यह एक पारंपरिक यूनानी औषधि है जो मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती रही है ।
5. हर्बल उपचार__नीम की छाल और पत्तियों का उपयोग मलेरिया-रोधी के रूप में किया जाता है ।
6. अन्य उपाय__ तुलसी और अदरक का पानी, या दालचीनी जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग बुखार को कम करने और प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए किया जाता है ।
7. अगर उल्टी होती है तो अर्क अजवाइन या अर्क अजीब ।
8. नीम के पत्तों को जला कर आसपास के वातारण से मच्छरों को भगाना।
9. यूनानी चिकित्सा में मलेरिया के महत्व के प्रमुख बिंदु__
(1). कुश्ता का उपयोग__यूनानी प्रणाली में मलेरिया के इलाज के लिए कुश्ता-ए-जमारुद , (2). कुश्ता-ए-सिम्मुल फार , (3). कुश्ता-ए-सदफ जैसी भस्म का उपयोग किया जाता है । ये भस्म संक्रमण और पुराने बुखार को ठीक करने में सहायक हैं ।