राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक महेश काले को कल पुणे में ‘संगीत सेवा’ श्रेणी के अंतर्गत प्रतिष्ठित लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। मास्टर दीनानाथ मंगेशकर, लता मंगेशकर और पूरे गौरवशाली मंगेशकर परिवार की विरासत से जुड़ा यह सम्मान काले के संगीत-सफर का एक भावनात्मक पड़ाव साबित हुआ - एक ऐसा सफर जो परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और कृतज्ञता में रचा-बसा है।
“इतने बड़े नाम और इतने बड़े परिवार से जुड़ा यह पुरस्कार मिलना, वह भी ‘संगीत सेवा’ के लिए, मेरे लिए बेहद गर्व और कृतज्ञता का विषय है। मंगेशकर परिवार ने हमेशा मुझ पर बहुत स्नेह बरसाया है और मेरा हर सदस्य से एक व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। मेरे गुरुजी के सुपुत्र शौनक अभिषेकी जी 90 के दशक में उषा आत्या (उषा मंगेशकर) के साथ गाया करते थे, और मैंने उनके रियाज़ और कॉन्सर्ट्स को करीब से देखा है… उन्हें इतने जज़्बे के साथ गाते देखना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक रहा है। हृदयनाथ जी (हृदयनाथ मंगेशकर) हमेशा मुझ पर बेहद कृपालु रहे हैं। मीना आत्या (मीना खडिकर), उषा आत्या, लता आत्या (लता मंगेशकर) और आशा आत्या (आशा भोसले) सभी ने मेरी इस यात्रा में मेरा साथ दिया है। आज मुझे आशा आत्या और लता आत्या की बहुत याद आ रही है। मुझे वह दिन याद है जब हृदयनाथ जी ने मुझे ‘कट्यार काळजात घुसली’ में सुना था और मुझे एक बहुत सुंदर आशीर्वाद दिया था… उन्होंने कहा था, ‘तुम्हारे गाने में तुम्हारे गुरु की मेहनत साफ झलकती है।’ मैं उस बात के लिए उनका ऋणी हूँ। आज का यह पुरस्कार मेरे गुरुजी की मुझ पर की गई मेहनत का परिणाम है। मैं इसे अपने गुरुजी पंडित जितेंद्र अभिषेकी जी के चरणों में समर्पित करता हूँ।”