पेसिफिक मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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Published on : 26 Apr, 26 11:04

सोनोग्राफी से भ्रूण के जन्मजात दोषों को पहचानने की दी गई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

पेसिफिक मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन


उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से ’भ्रूण की सोनोग्राफी और जन्मजात विसंगतियों की पहचान’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य की सटीक निगरानी करना और समय रहते किसी भी संभावित जन्मदोष का पता लगाना था।
कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यावहारिक दृष्टिकोण रहा। इसमें प्रदेश भर से आए 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चिकित्सा विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी, बल्कि हैंड्स-ऑन और सिम्युलेशन तकनीक के माध्यम से भ्रूण की सोनोग्राफी करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया। आधुनिक मशीनों पर डमी और सिम्युलेटर्स की मदद से डॉक्टरों को यह सिखाया गया कि कैसे सूक्ष्म विसंगतियों को बारीकी से पहचाना जा सकता है।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. सुनीता माहेश्वरी ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, हमारा प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म से पहले ही भ्रूण में होने वाली किसी भी शारीरिक या संरचनात्मक खराबी का पता लगाया जा सके। यदि समय रहते जन्मजात दोषों की पहचान हो जाती है, तो उनके उपचार या प्रबंधन की योजना पहले से बनाई जा सकती है, जिससे शिशु के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है और मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलती है।“
इस अवसर पर पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने वर्कशॉप के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि पेसिफिक मेडिकल कॉलेज न केवल मरीजों को उत्तम और रियायती स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अग्रणी है, बल्कि आगामी पीढ़ी के चिकित्सकों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्थान भविष्य के डॉक्टरों को नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और अनुसंधान से अवगत कराने के लिए ऐसी उच्च-स्तरीय कार्यशालाओं के आयोजन के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगा।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि आज के दौर में अल्ट्रासाउंड तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों की छोटी से छोटी कमी को भी पकड़ा जा सकता है। इस प्रशिक्षण से न केवल उदयपुर बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के चिकित्सकों के कौशल में वृद्धि होगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और विभाग के अन्य वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

 


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