उदयपुर। मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान द्वारा आयोजित “महाराणा सम्मानरक्षा महाबैठक” मीरा मेदपाट भवन, चित्रकूट नगर में अत्यंत गरिमामय एवं जोशीले वातावरण में सम्पन्न हुई। बैठक में 400 से अधिक क्षत्रिय समाज के गणमान्यजनों, बुद्धिजीवियों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और समाज की एकजुटता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
बैठक का मुख्य विषय भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, जोधपुर में महाराणा विश्वराज सिंह जी मेवाड़ को प्रतिवादी बनाए जाने के मुद्दे पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने इसे मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा और मान-सम्मान पर सीधा आघात बताया तथा इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की।
बैठक में समाज के अनेक वरिष्ठ एवं प्रमुख व्यक्तियों ने अपने विचार रखते हुए स्पष्ट किया कि महाराणा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि मेवाड़ की शताब्दियों पुरानी अस्मिता और परंपरा के प्रतीक हैं, जिनके सम्मान से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
गहन विचार-विमर्श के पश्चात सर्वसम्मति से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि मेवाड़ क्षत्रिय महासभा संस्थान अपने समस्त सदस्यों एवं विभिन्न शाखाओं के साथ मिलकर शीघ्र ही विद्या प्रचारिणी सभा कार्यालय पहुंचेगी और वहां लगे ताले खोलकर संस्थान के मूल उद्देश्य - समाज के उत्थान एवं शिक्षा - को पुनः स्थापित करेगी।
साथ ही यह भी दृढ़ता से घोषित किया गया कि किसी भी परिस्थिति में मेवाड़ क्षत्रिय महासभा अपने संरक्षक महाराणा मेवाड़ के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। समाज के प्रत्येक स्तर पर जनजागरण चलाकर इस विषय की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया गया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख जनों में बालू सिंह कानावत (अध्यक्ष), डॉ. पृथ्वी राज सिंह चौहान (शहर अध्यक्ष), तेज सिंह जी बांसी, प्रताप सिंह जी तलावदा, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, युवराज सिंह झाला, लक्ष्मण सिंह झाला, प्रेम सिंह मदारा, देशबंधु सिंह सहित अनेक गणमान्यजन शामिल रहे।
बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि मेवाड़ की अस्मिता की रक्षा हेतु समाज हर स्तर पर एकजुट होकर निर्णायक कदम उठाने को तैयार है।