आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म 'एक दिन’ 1मई को रिलीज हो गई है। इस फिल्म की कहानी स्नेहा देसाई और स्पंदन देसाई ने लिखी है और सुनील पांडे ने डायरेक्ट की है। फिल्म की कहानी दिनेश (जुनैद खान) के इर्द-गिर्द घूमती है। दिनेश एक ऐसा कंप्यूटर गीक है जिसे उसके ऑफिस में किसी को भी उसकी मौजूदगी का एहसास नहीं।दिनेश को अपनी कलीग मीरा (साई पल्लवी) से एकतरफा प्यार है। फिल्म की कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब ऑफिस की पूरी टीम जापान के सपोरो जाती है। यहां मीरा के साथ एक हादसा होता है और उसकी याददाश्त एक दिन के लिए (टेम्पररी अमनेशिया) चली जाती है। दिनेश को लगता है कि ये भगवान का इशारा है और आगे क्या होता है ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर ‘एक दिन’ देखनी होगी। इमोशन को डिजिटल युग के हिसाब से निर्देशक सुनील पांडे ने स्क्रीन पर उतरने की कोशिश की है और इसमें वो आज के हिसाब से सफल भी माने जा सकते हैं। मनोज लोबो की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का इकलौता प्लस पॉइंट है। जापान की लोकेशन, बर्फ से ढकी वादियां और सपोरो का स्नो फेस्टिवल पर्दे पर बेहद खूबसूरत लगता है. राम संपत का बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी की भावनाओं को थामने की कोशिश करता है। जुनैद खान फिल्म के हीरो हैं, काम भी ठीक ही किया है लेकिन उनका लाउड होना और किरदार के प्रति जरूरत से ज्यादा डेडिकेशन कभी-कभी बनावटी लगने लगता है। वहीं साई पल्लवी इस फिल्म की जान हैं। फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों को न्याय देने की पूरी कोशिश की है। आमिर खान प्रोडक्शन की नवीनतम प्रस्तुति 'एक दिन', थाई फिल्म 'वन डे' पर आधारित है। हर इंसान सोचता है कि एक दिन ऐसा हो जाए। एक दिन वैसा हो जाए ये फिल्म उसी इमोशन को समेटने की नाकाम कोशिश करती है और संदेश दे जाती है कि जागती आंखों से सपने देखने वालों के सपने एक दिन सच हो जाते हैं....पूरे हो जाते हैं।