राजस्थान में भी जनगणना का कार्य शुरू: विकास की नई रूपरेखा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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Published on : 01 May, 26 18:05

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

राजस्थान में भी जनगणना का कार्य शुरू: विकास की नई रूपरेखा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

देश में भूगोल की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य राजस्थान में भी 1 मई से 16वीं जनगणना का कार्य प्रारंभ हो गया है। राजस्थान में शुरू हुई जनगणना - 2026-27 के तहत “स्व-गणना” यानी सेल्फ एन्‍यूमरेशन की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार को राज्य की राजधानी जयपुर के लोक भवन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे द्वारा किया गया। इसके साथ ही राज्य भर में जनगणना का पहला चरण शुरू हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी अपने अपने राजकीय निवासों पर जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना में स्वयं भाग लेकर नागरिकों को प्रेरित किया। उन्होंने आधिकारिक पोर्टल  se.census.gov.in पर जाकर अपना विवरण भरते हुए आवश्यक जानकारियाँ दर्ज कर फॉर्म सबमिट किया। राज्य के प्रशासनिक मुखिया मुख्यसचिव वी श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में डिजिटली 'सेल्फ एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) फॉर्म सबमिट किया।
 
इस अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी और मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने प्रदेश के नागरिकों से जनगणना के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने और स्व-गणना के माध्यम से सटीक और पूर्ण जानकारी प्रदान करने की अपील की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा जनगणना वेब पोर्टल को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है, जिससे नागरिक बिना किसी कठिनाई के अपना विवरण भर सकेंगे। उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे अन्य लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में सहायता करें ताकि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि ''जनगणना -2027'' के पवित्र कार्य में आम जन का सहयोग ही राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में उनकी भागीदारी है। सभी प्रदेशवासी गणनाकर्मियों का स्वागत करें। सही जानकारी दें। कोई भी संदेह हो तो हेल्पलाइन पर संपर्क करें।उल्लेखनीय है कि 1 मई  से शुरू हुई यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा का संग्रह डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नागरिकों को एक सुरक्षित वेब-आधारित प्रणाली के माध्यम से स्व-गणना की सुविधा भी प्रदान की गई है।

राजस्थान के जनगणना निदेशक विष्णु चरण मलिक ने बताया कि घर-घर जनगणना सर्वेक्षण से पहले, नागरिक 1 मई  से 15 मई, 2026 तक वेब पोर्टल पर स्व-गणना सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इस अवधि के दौरान, व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर और लैपटॉप पर आवश्यक विवरण का उपयोग करके पोर्टल https://se.census.gov.in पर लॉग इन कर अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी डिजिटल रूप से जमा कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में जनगणना एक सुव्यवस्थित और नियमित प्रक्रिया है, जो देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है। भारत में जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर आयोजित की जाती है। इसे “दशकीय जनगणना” कहा जाता है। यह परंपरा 1881 से नियमित रूप से चली आ रही है, जब पहली बार पूरे देश में एक साथ जनगणना कराई गई थी। भारत में अंतिम जनगणना वर्ष 2011 में सम्पन्न हुई थी। इसे भारत की 15वीं जनगणना माना जाता है।इसके आंकड़ों के अनुसार देश की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ दर्ज की गई थी।10 वर्ष के अंतराल में जनगणना होने के नियम अनुसार वास्तव में वर्ष 2021 में जनगणना प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।अब नई प्रक्रिया के तहत जनगणना का कार्य चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू किया जा रहा है, जिसकी निगरानी रजिस्ट्रार जनरल एंड सेन्सस कमिश्नर ऑफ इंडिया द्वारा की जाती है। 

इस वर्ष 2026–27 के दौरान राजस्थान सहित कई राज्यों में प्रारंभिक तैयारियाँ और स्व-गणना (सेल्फ एन्युमेरेशन ) की शुरुआत की जा चुकी है।यह इस बार की जनगणना को अधिक डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।जनगणना सामान्यतः दो प्रमुख चरणों में पूरी होती है:
गृह सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग फेज )
जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन एन्युमेरेशन फेज ) वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार जनगणना का प्रारंभिक कार्य और डेटा संग्रह 2026 से शुरू होकर2027 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम समय-सीमा सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार तय होती है, इसलिए इसमें कुछ परिवर्तन संभव है।

इस प्रकार भारत में जनगणना हर 10 वर्ष में होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है। पिछली बार यह 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण टल गई। अब सोलह वर्षों के बाद 2026–27 में इसे नए डिजिटल स्वरूप के साथ फिर से शुरू किया गया है, जो संभवतः 2027 तक पूर्ण होगी। यह प्रक्रिया देश के विकास की योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीतिगत निर्णयों की आधारशिला होती है, इसलिए इसका समय पर और सटीक रूप से संपन्न होना अत्यंत आवश्यक है।जनगणना का कार्य न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश और राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक चरण भी है। जनगणना किसी भी देश या राज्य की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का दर्पण होती है। इससे प्राप्त आंकड़े सरकार को नीतियों के निर्माण, संसाधनों के वितरण और भविष्य की योजनाओं के निर्धारण में आधार प्रदान करते हैं।

राजस्थान में जनगणना का कार्य के प्रारंभ होने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियाँ की गई हैं। राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गणनाकर्मियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और डिजिटल उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इस बार जनगणना को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। मोबाइल ऐप और ऑनलाइन डेटा एंट्री जैसी सुविधाओं से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।जनगणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से उसके परिवार, शिक्षा, रोजगार, आय, आवास, और सामाजिक स्थिति से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे जाएंगे। ये आंकड़े सरकार को यह समझने में मदद करेंगे कि किन क्षेत्रों में विकास की आवश्यकता अधिक है और किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में शिक्षा का स्तर कम पाया जाता है, तो वहां स्कूलों और शिक्षण संसाधनों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती है।

राजस्थान जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में जनगणना का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां के रेगिस्तानी इलाकों से लेकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक, हर क्षेत्र की अपनी अलग चुनौतियाँ और आवश्यकताएँ हैं। जनगणना के आंकड़े इन सभी क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को उजागर करेंगे और राज्य सरकार को संतुलित विकास की दिशा में कार्य करने में मदद करेंगे।इसके अलावा, जनगणना के आंकड़े राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं। निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (डेलिमिटेशन) में भी इन आंकड़ों का उपयोग किया जाता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधिक और न्यायसंगत बनाया जा सके। साथ ही, विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास योजनाएं आदि में लाभार्थियों की पहचान भी इन्हीं आंकड़ों के आधार पर की जाती है।
हालांकि जनगणना एक व्यापक और जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इसमें आम नागरिकों की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। लोगों को चाहिए कि वे गणनाकर्मियों को सही और सटीक जानकारी दें, ताकि प्राप्त आंकड़े वास्तविकता के अधिक निकट हों। किसी भी प्रकार की गलत जानकारी न केवल आंकड़ों को प्रभावित करती है, बल्कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

कुल मिला कर राजस्थान में जनगणना का कार्य शुरू होना एक सकारात्मक संकेत है कि राज्य विकास की नई दिशा में अग्रसर है। यह प्रक्रिया न केवल वर्तमान की तस्वीर प्रस्तुत करेगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं की नींव भी रखेगी। यदि इस कार्य को पारदर्शिता, ईमानदारी और सक्रिय जनभागीदारी के साथ पूरा किया जाए, तो यह निश्चित रूप से राजस्थान को प्रगति के नए आयामों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा।


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