उदयपुर। आर्य जगत् के भामाशाह,उद्योगपति एवं श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के संरक्षक बाबू दीनदयाल जी गुप्ता को नवलखा महल स्थित माता लीलावन्ती वैदिक संस्कृति सभागार में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष श्री अशोक आर्य ने बताया कि बाबू दीनदया जी गुप्ता श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास से इसकी स्थापना से ही जुड़े हुए थे। उन्होंने यहां पर विभिन्न प्रकल्पों यज्ञशाला, सुरेश चन्द्र दीनदयाल गुप्त मिनी थियेटर, सोलह संस्कार वीथिका आदि के लिए अपने दान की आहूति दी। इसी प्रकार न्यास की पत्रिका सत्यार्थ सौरभ को निरन्तरता प्रदान करने हेतु आपने डालर बनियान की ओर से प्रतिमाह विज्ञापन दिलाते हुए पत्रिका विगत पन्द्रह वर्षाें से गति प्रदान की। इसी प्रकार प्रतिवर्ष न्यास की ओर से आयोजित होने वाले सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव के लिए आपने अर्थ सहयोग किया ऐसे दानवीर के चले जाने से उद्योग जगत् ही नहीं वरन् संपूर्ण आर्य जगत् को गहरी क्षति हुई है। हमें उनके आदर्शाें पर चलना चाहिए।
श्री आर्य ने बताया कि श्री दीनदयाल जी गुप्त का जन्म कार्तिक सुदी त्रयोदशी, विक्रम संवत्- 1999, दिनांक 21 नवंबर 1942, शनिवार को ग्राम मानहेरू, जिला भिवानी (हरियाणा) में वैश्य परिवार में हुआ। कक्षा दसवीं तक पढ़ाई गांव में ही हुई। सन् 1962 में उनका विवाह हरियाणा में ही हुआ। विवाह के उपरांत 1962 में ही कोलकाता को व्यावसायिक रूप में चुना और कोलकाता आकर पूर्व के दो वर्ष सर्विस करने के बाद अपना होजरी का कार्य पार्टनरशिप में आरंभ किया। प्रसिद्ध होजरी और परिधान ब्रांड डॉलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और कंपनी के विकास में उनकी अहम भूमिका रही। उन्हें पश्चिम बंगाल होजरी एसोसिएशन द्वारा ‘वॉल ऑफ फेम’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। डॉलर इंडस्ट्रीज भारत की प्रमुख होजरी कंपनियों में से एक है, जो मुख्य रूप से अंतर्वस्त्र (इनर वीयर) का निर्माण करती है। आप आर्य समाज बड़ा बाजार से जुड़े और जुड़कर बहुत कम समय में समाज के सभी पदों पर रहते हुए आप संरक्षक सदस्य और बंगाल प्रतिनिधि सभा के प्रधान पद पर रहे। श्री दीनदयाल जी गुप्त आजीवन अनेक गुरुकुलों और आर्य समाजों में सात्विक सहयोग करते रहे। सार्वदेशिक सभा दिल्ली के उप प्रधान थे। छह दशक तक आपने आर्य समाज की विचारधारा को आगे बढ़ाने का हरसंभव प्रयत्न किया। इस अवधि में आपने भारत देश तथा विदेशों में आर्य महासम्मेलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। 84 वर्ष की आयु में आज ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा, विक्रम संवत् -2083, दिनांक 2 मई 2026, शनिवार को आपका कोलकाता में आकस्मिक निधन हुआ। बाबू दीनदयाल जी गुप्त की परमपिता परमात्मा से प्रार्थना रहती थी कि आर्य वैदिक विचारधारा को जितना हो सके बढ़ाने की कोशिश करुं ताकि देश में अंधविश्वास व अविद्या को सर्वथा निर्मूल किया जा सके जिससे मानव जाति का कल्याण हो और पुनः हमारा देश पूर्व की भांति विश्वगुरु का गौरव प्राप्त कर सके।
न्यास के मंत्री श्री भवानीदास आर्य ने बताया कि बाबू दीनदयाल जी गुप्ता की प्रेरणा से हम नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र को आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला पाये हैं। इस अवसर पर न्यास के संयुक्त मंत्री डॉ. अमृतलाल तापड़िया, न्यासी श्रीमती शारदा गुप्ता, श्रीमती ललिता मेहरा, कोषाध्यक्ष श्री नारायण लाल मित्तल, न्यासी श्री बलराम चौहान, डॉ.एस.के.माहेश्वरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कार्यालय मंत्री श्री भंवर लाल गर्ग, लेखा प्रबन्धक श्री दिव्येश सुथार, पुरोहित श्री नवनीत आर्य, एनएमसीसी की संयोजक श्रीमती दुर्गा गोरमात, गाइड श्री सिद्धम,श्री गौरव,श्री देवीलाल पारगी, श्री कालूलाल,श्रीमती निरमा,श्रीमती रेखा एवं न्यास के कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
श्रद्धांजलि सभा में दो मिनिट का मौन रखकर परमपिता परमात्मा से प्रार्थना की गई कि वे दिवंगत आत्मा को अपनी ममतामयी गोद में स्थान प्रदान करे।
इस अवसर पर उनकी स्मृति में पुरोहित श्री नवनीत आर्य के पौरोहित्य में यज्ञ का आयोजन भी किया गया।