उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने और विद्यार्थियों को समयबद्ध शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब “नो-डिले सेशन” की अवधारणा को लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है, ताकि परीक्षाएं, परिणाम और प्रवेश प्रक्रिया तय समय पर पूरी हो सके।
कुलपति प्रो. सारस्वत ने बताया कि आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया 11 अप्रैल से ही शुरू कर दी गई है, जो पूर्व वर्षों की तुलना में काफी पहले प्रारंभ हुई है। प्रवेश प्रक्रिया 30 मई तक चलेगी, जबकि पूरी प्रक्रिया अगस्त मध्य तक पूर्ण कर ली जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू होगा, जिससे विद्यार्थियों को सत्र विलंब की समस्या से राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के कारण शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हुआ था, लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन मिशन मोड में कार्य करते हुए इस अंतर को समाप्त करने में जुटा है। शिक्षकों से भी ग्रीष्मावकाश के दौरान सहयोग देने का अनुरोध किया गया है ताकि लंबित पाठ्यक्रम समय पर पूर्ण हो सके।
इसे विश्वविद्यालय के हाल के वर्षों के सबसे बड़े शैक्षणिक सुधारों में से एक बताते हुए कुलपति ने कहा कि द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं मई के अंत तक शुरू कर दी जाएंगी, जबकि उनके परिणाम जून के अंतिम सप्ताह तक घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे उन हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा जो उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या राष्ट्रीय स्तर की नौकरियों के लिए आवेदन करते समय विलंबित परिणामों के कारण परेशान होते रहे हैं।
प्रो. सारस्वत ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय लंबे समय से चली आ रही “डिले सेशन” की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि इस शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं, परीक्षाएं और परिणाम नियमित एवं समयबद्ध तरीके से संचालित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में सुधारों का उल्लेख करते हुए कुलपति ने बताया कि पीएचडी प्रवेश के लिए नई अधिसूचना जारी कर दी गई है और अब प्रवेश पूरी तरह यूजीसी नियमों के अनुसार किए जाएंगे। चयन मुख्यतः नेट स्कोर और मेरिट के आधार पर होगा तथा आरक्षण नीति का भी पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में प्रवेशित शोधार्थियों का कोर्सवर्क लगभग पूर्ण हो चुका है और शीघ्र ही परीक्षाएं आयोजित कर जून-जुलाई तक शोध निर्देशकों का आवंटन कर दिया जाएगा, जिससे शोध कार्य बिना अनावश्यक देरी के शुरू हो सके।
प्रशासनिक मुद्दों पर बोलते हुए प्रो. सारस्वत ने राजस्थान के विश्वविद्यालयों में पेंशन संबंधी समस्याओं को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि पेंशन को लेकर बनी अनिश्चितता भविष्य में प्रतिभाशाली शिक्षाविदों को विश्वविद्यालय सेवाओं से दूर कर सकती है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं में विश्वविद्यालय ने भर्ती अनुमति, रिक्त फैकल्टी पदों तथा कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत लंबित पदोन्नतियों के मुद्दे भी उठाए हैं, जिन पर सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिला है।
कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय की भूमि, आधारभूत संरचना विकास और वित्तीय सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा जारी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक, डीन, निदेशकों और विभागाध्यक्षों सहित सभी अधिकारियों के सहयोग और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भूमिका से सुधार कार्य तेजी से लागू हो पा रहे हैं।
अंत में प्रो. सारस्वत ने कहा कि विद्यार्थी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। विश्वविद्यालय का अस्तित्व विद्यार्थियों के लिए है और लागू किए जा रहे सभी सुधार उनके शैक्षणिक भविष्य और करियर को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।