उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ नर्सिंग द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्सेस दिवस (सप्ताह ) 2026 के उपलक्ष्य में “कैरोस- डी-एडिक्शन अवेयरनेस वर्कशॉप” का आयोजन शनिवार को पीएमसीएच ऑडिटोरियम में किया गया। क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित इस कार्यशाला में संभाग के विभिन्न नर्सिंग एवं स्वास्थय शिक्षा संस्थानों से 400 से अधिक विद्यार्थियों, पीएचडी स्कॉलर्स एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं एवं स्वास्थयकर्मियों में नशे के दुष्प्रभावों, रोकथाम, मानसिक स्वास्थय एवं पुनर्वास के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पेसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के डीन पीजी डॉ.आर.के.पालीवाल, गीतांजलि कॉलेज ऑफ नर्सिंग की डीन डॉ. विजया अजमेरा,नर्सिंग सुपरिटेंडेंट भरत पाटीदार, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ.एम.एस.देवड़ा एवं फैकल्टी ऑफ नर्सिंग के डीन डॉ.के.सी.यादव ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करके किया।
उद्घाटन के इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष एवं फैकल्टी ऑफ नर्सिंग के डीन प्रो. (डॉ.) के. सी. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में नशा युवाओं के भविष्य, मानसिक स्वास्थय एवं सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, जागरूकता एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही नशामुक्त समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। इस कार्यक्रम का आयोजन फ्यूचर नर्सेज को सशक्त बनाने के लिए क्या गया क्योंकि नर्सेज ही मरीजों और कम्युनिटी में जनजागृक्त के मध्यम से नशा मुक्त समाज की कल्पना की जा सकती है
कार्यशाला के आयोजन सचिव प्रो. (डॉ.) संजय नागदा ने बताया कि कैरोस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के सामाजिक, मानसिक एवं शारीरिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग विद्यार्थियों की समाज में स्वास्थय जागरूकता फैलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यशाला के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में पीएमसीएच के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ.आशीष गोयल ने सब्सटांस एब्यूज के जोखिम विषय पर व्याख्यान देते हुए नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, जोखिम कारकों एवं सामुदायिक स्तर पर रोकथाम की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की लत को सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थय से जुड़ी गंभीर समस्या बताते हुए जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया।
द्वितीय सत्र में प्रो. (डॉ.) संजय नागदा, विभागाध्यक्ष मेडिकल सर्जिकल नर्सिंग ने एडिक्शन के सामाजिक एवम व्यावसायिक विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थय, पारिवारिक संबंधों, सामाजिक व्यवहार एवं शैक्षणिक प्रदर्शन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान पीएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. हसमुख पंचाल ने मादक पदार्थों के विभिन्न अंगों पर दुष्प्रभाव विषय पर बताते हुए कहा कि शराब, तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थ शरीर के विभिन्न अंगों पर गंभीर प्रभाव डालते हैं तथा समय रहते पहचान एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है।
मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास गौर ने मानसिक मूल्यांकन एवम काउन्सलिंग विषय पर व्याख्यान देते हुए मानसिक स्वास्थय, व्यवहार परिवर्तन, काउंसलिंग एवं पुनर्वास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नशे से ग्रसित व्यक्तियों को सामाजिक समर्थन एवं उचित मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंतिम शैक्षणिक सत्र में क्लिनिकल साइकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक सालवी ने माइंडफुलनेस विषय पर विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, माइंडफुलनेस एवं पुनर्वास प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनकर स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन अपनाने का संदेश दिया।
आयोजनकर्ता विशाल चौहान ने बताया कि कार्यशाला के दौरान सब्सटांस एब्यूज विषय पर पोस्टर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने आकर्षक एवं जागरूकता आधारित पोस्टर्स प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों, रोकथाम एवं स्वस्थ जीवनशैली का प्रभावी संदेश दिया गया। कार्यक्रम में प्री एवं पोस्ट टेस्ट, इंटरैक्टिव लर्निंग सेशन्स एवं प्रश्नोत्तर गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।
कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण एवं जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय मेडिकल सर्जिकल नर्सिंग विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम में पीएमसीएच के प्रोफेसर डॉ जगदीश विश्नोई, डॉ. महेंद्र खत्री, डॉ. जयेश त्रिवेदी, डॉ. रोहित, डॉ.आलोक रावतएवं डॉ. धवल उपस्थित रहे।