राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोक कल्याणकारी

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Published on : 14 May, 26 05:05

राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोक कल्याणकारी

नीति गोपेन्द्र भट्ट 

 

नई दिल्ली/जयपुर । राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी. मालू  ने राजस्थानी भाषा को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार, 12 मई को दिए गए ऐतिहासिक फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह अभूतपूर्व  फैसला करोड़ों राजस्थानियों के लिए गौरवमय और मंगलकारी है। 

 

मालू ने जयपुर से जारी अपने बयान में कहा कि  माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा राजस्थान सरकार को सरकारी और निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने की नीति बनाने और संविधान की भावना के अनुरूप बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना राज्यों की जिम्मेदारी है तथा राजस्थानी जैसी समृद्ध भाषा को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान मिलना चाहिए के सम्बन्ध में दिए गए निर्देश तथा तीस सितम्बर तक इसकी अनुपालना रिपोर्ट देने सम्बंधी महत्वपूर्ण फैसले से राजस्थान ही नहीं, देश-विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों में असीम खुशी का संचार हुआ है तथा मायड़ भाषा प्रेमियों को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया है। साथ ही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त करने की दिशा में भी इसे एक ठोस उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। 

 

मालू ने कहा कि राजस्थानी भाषा मान्यता समिति इस फैसले के लिए सर्वोच्च न्यायालय, खंडपीठ और दोनों माननीय न्यायमूर्ति का स्वागत, धन्यवाद तथा आभार प्रकट करती है। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करने वाले दोनों याचिका कर्ताओं पदम मेहता और प्रो.कल्याण सिंह शेखावत के प्रति भी अपनी कृतज्ञता प्रकट करती है।

 

के.सी. मालू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने न सिर्फ देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान का मान बढ़ाया है, बल्कि राजस्थानी भाषा को कानूनी समर्थन देकर संवैधानिक मान्यता का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया है। इस फैसले से मायड़ भाषा के प्रेमियों, हितैषियों और शुभचिंतकों को संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त करने का नैतिक अधिकार भी मिल गया है।

 

मालू ने बताया कि इस फैसले से देश-विदेश में बड़ी संख्या में बसे प्रवासी राजस्थानियी की नई पीढ़ी में न सिर्फ राजस्थानी भाषा का प्रचार-प्रसार होगा, बल्कि राजस्थान की विरासत, कला-संस्कृति, संगीत और साहित्य की वैश्विक पटल पर स्वीकार्यता भी बढ़ेगी तथा भाषा को मान-सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो अभिभावक अभी तक अपने बच्चों को राजस्थानी भाषा पढ़ाने वाले स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने से कतराते थे तथा जो छात्र मायड़ भाषा पढ़ने में हिचकिचाते थे, वे अब गर्व के साथ राजस्थानी में अध्ययन कर सकेंगे। साथ ही राजस्थानी छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी विषय लेकर गैर-राजस्थानी छात्रों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन और रोजगारोन्मुखी शैक्षिक उपलब्धि हासिल कर पाएंगे।  साथ ही हमारे होनहारों के लिए अपना भाषाई कौशल दिखाने के साथ रोजगार के नए द्वार और उद्यम के व्यापक रास्ते खुलेंगे।


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