उदयपुर | उदयपुर स्थित सर्किट हाउस में EWS जन जागृति मंच के तत्वावधान में आयोजित होने वाली "विचार गोष्ठी कार्यक्रम" की पूर्व तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण में सरलीकरण की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस दौरान EWS वर्ग के प्रबुद्धजनों ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी का राजस्थान में EWS आरक्षण के सरलीकरण के लिए आभार व्यक्त करते हुए उनका अभिनंदन किया।
बैठक को संबोधित करते हुए श्री अशोक गहलोत जी ने कहा कि केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए EWS आरक्षण में सरलीकरण आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह सुधार अवश्य होना चाहिए और इसके लिए सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी EWS आरक्षण के केंद्र में सरलीकरण की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि पात्रता मानदंड सरल होने के बाद ही समाज में आर्थिक समानता और अवसरों की वास्तविक समानता स्थापित हो सकेगी।
मुख्य वक्ता एवं RTDC के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2019 में लागू किया गया 10 प्रतिशत EWS आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए ऐतिहासिक निर्णय था, लेकिन वर्तमान पात्रता शर्तों के कारण अनेक वास्तविक जरूरतमंद इससे वंचित रह जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS वर्ग की सीमित भागीदारी इस बात का संकेत है कि व्यवस्था जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पा रही है।
राठौड़ ने विशेष रूप से भूमि संबंधी शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 5 एकड़ कृषि भूमि की सीमा आज के आर्थिक परिदृश्य में व्यवहारिक नहीं है। कृषि लागत बढ़ने और आय सीमित रहने के बावजूद किसानों को EWS श्रेणी से बाहर रखना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मकान संबंधी शर्तों के कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कई युवाओं को पात्रता के लिए अलग रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने केंद्र और राज्य की आरक्षण नीतियों में विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई समुदाय राज्य स्तर पर OBC श्रेणी में शामिल हैं, लेकिन केंद्र में सामान्य वर्ग में होने के कारण उन्हें EWS के तहत भी पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। राठौड़ ने राजस्थान में पूर्व में अपनाए गए लचीले EWS मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि भूमि और मकान संबंधी शर्तों में राहत देकर अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया था। इसी प्रकार की व्यवहारिक नीति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।
बैठक के अंत में मंच की ओर से मांग की गई कि EWS आरक्षण में भूमि एवं आवास से संबंधित शर्तों को समाप्त किया जाए, पात्रता मानदंडों को अधिक समावेशी बनाया जाए तथा नीति में एकरूपता लाकर सभी पात्र वर्गों को न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
बैठक में श्री पंकज शर्मा (ब्राह्मण महासभा उदयपुर)
श्री दिनेश खोड़निया (अध्यक्ष श्री दिगम्बर जैन महासंघ उदयपुर) श्री लाल सिंह झाला (पूर्व अध्यक्ष श्री महाराणा प्रताप बोर्ड)
क्षत्रिय महासभा से राजेंद्र सिंह चुण्डावत, बलवीर सिंह, महेंद्र सिंह चौहान, अरविंद सिंह चुण्डावत और धीरेन्द्र सिंह सिसोदिया, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से हेमेंद्र सिंह दवाणा और छत्रपाल सिंह,
करणी सेना से अर्जुन सिंह और लाल सिंह सहित राजदीप सिंह, जोगेंद्र सिंह, देवेन्द्र सिंह, मनोहर सिंह, भैरू सिंह, नवल सिंह, गजेंद्र सिंह, मान सिंह, हर्षवर्धन नाथ, धर्मवीर सिंह, उत्तम सिंह, भँवर सिंह और जसवंत सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।