साहित्य समाज की संवेदनाओं को जगाने का सशक्त माध्यमःबलराम

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Published on : 18 May, 26 19:05

डॉ आलम शाह खान की 23वीं पुण्यतिथि पर “हिंदी कहानीःआज और कल” विषयक संगोष्ठी आयोजित

साहित्य समाज की संवेदनाओं को जगाने का सशक्त माध्यमःबलराम

उदयपुर । बसुप्रसिद्ध कथाकार डॉ आलम शाह खान की 23वीं पुण्यतिथि पर आयोजित “हिंदी कहानी रू आज और कल” विषयक कार्यक्रम में केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की प्रतिष्ठित पत्रिका समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक एवं चर्चित कथाकार बलराम ने कहा कि साहित्य समाज की सोई हुई संवेदनाओं और चेतना को जगाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत आलम शाह खान यादगार समिति की समन्वयक प्रोफेसर तराना परवीन द्वारा डॉ आलम शाह खान के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों के स्वागत से हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बलराम ने कहा कि डॉ आलम शाह खान देश के उन विरले कथाकारों में थे, जिन्होंने समाज के उपेक्षित, अछूते और वंचित वर्गों के जीवन को अपनी कहानियों का केंद्र बनाया। उनकी रचनाओं में इतनी गहरी संवेदना है कि वे सीधे पाठकों के हृदय को स्पर्श करती हैं। उन्होंने कहा कि डॉ खान दूरदृष्टा रचनाकार थे और उन्होंने उन विषयों पर लेखन किया, जिनसे अधिकांश लेखक बचते रहे।
कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता पद्मश्री डॉ चंद्रप्रकाश देवल ने कहा कि डॉ आलम शाह खान की भाषा और शैली अत्यंत प्रभावशाली एवं अद्वितीय थी। उन्होंने राजस्थानी साहित्य के महत्वपूर्ण ग्रंथ वंश भास्कर पर ऐतिहासिक कार्य किया और जीवनभर मानवीय मूल्यों के पक्षधर बने रहे। युवा उपन्यासकार नवीन चैधरी ने वर्तमान युवा पीढ़ी के साहित्य सृजन पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की कहानी का स्वरूप बदल रहा है और युवाओं में शोधपरक लेखन की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
प्रमुख आलोचक डॉ माधव हाड़ा ने “कहानीःआज और कल” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहानी साहित्य के बदलते आयामों पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं कथाकार फारूक आफरीदी ने कहा कि डॉ आलम शाह खान मानवाधिकारों के सशक्त पैरोकार थे और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के प्रति बेहद संवेदनशील थे। उन्होंने डॉ खान की समग्र कहानियों को नए पाठकों और रचनाकारों तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय लोक कला मंडल के निदेशक लईक हुसैन ने की, जबकि आबिद अदीब ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर सरवत खान ने किया। डॉ तबस्सुम ने स्वागत उद्बोधन तथा शकील खान ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर सदाशिव श्रोत्रिय, माधव नागदा, प्रोफेसर हेमेन्द्र चंडालिया, बाल साहित्यकार विमला भंडारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।


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