सांसारिक चिंता ईश्वर से दूर और पारमार्थिक चिंता प्रभु के समीप लाती है: रासेश्वरी देवी जी

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Published on : 19 May, 26 02:05

आशीष वाटिका में श्रीमद्भागवत महापुराण के व्यावहारिक विज्ञान से भावविभोर हुए श्रद्धालु

सांसारिक चिंता ईश्वर से दूर और पारमार्थिक चिंता प्रभु के समीप लाती है: रासेश्वरी देवी जी

उदयपुर। ब्रज गोपिका सेवा मिशन के तत्वावधान में हिरण मगरी सेक्टर-13 स्थित आशीष वाटिका में आयोजित नौ दिवसीय पंचम वेद श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान रहस्य महोत्सव के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका रासेश्वरी देवी ने व्यासपीठ से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल और तार्किक शैली में समझाते हुए कहा कि “सांसारिक चिंता जीव को ईश्वर से दूर करती है, जबकि पारमार्थिक चिंता प्रभु के समीप ले जाती है।”


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती के साथ हुआ। रासेश्वरी देवी जी ने उदयपुर के प्रति विशेष आत्मीयता व्यक्त करते हुए बताया कि वे वर्ष 2006 में पहली बार यहां आई थीं और 20 वर्षों बाद भी यहां के श्रद्धालुओं का प्रेम और समर्पण आज भी वैसा ही बना हुआ है।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कोई सामान्य धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के दुखों को जड़ से समाप्त करने वाला “व्यावहारिक आध्यात्मिक विज्ञान” है। उन्होंने औषधि और रसायन का उदाहरण देते हुए समझाया कि औषधि बीमारी के बाद उपचार करती है, जबकि रसायन व्यक्ति को इतना सक्षम बना देता है कि रोग पास ही न आए। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत मनुष्य को सांसारिक विकारों से बचाने वाला दिव्य रसायन है।

देवी जी ने सुखदेव जी और राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब भागवत कथा प्रारंभ होने वाली थी, तब इंद्र सहित देवता अमृत कलश लेकर पहुंचे और कथा-अमृत के बदले सांसारिक अमृत देने का प्रस्ताव रखा। इस पर सुखदेव जी ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि देवताओं का अमृत केवल लंबी आयु दे सकता है, लेकिन भागवत का अमृत जीव को निर्भय और दिव्य जीवन प्रदान करता है।

उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि केवल धन अर्जित करना और भौतिक उपलब्धियों के पीछे भागना ही जीवन का उद्देश्य नहीं है। आत्मचिंतन, विवेक और ईश्वर से जुड़ाव ही वास्तविक सफलता का मार्ग है।

प्रवचन के दौरान जब रासेश्वरी देवी जी ने जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा रचित पद “बाट निहारी तिहारी पल-पल…” और “श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा…” का संकीर्तन कराया, तो पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

अंत में श्रीमद्भागवत महापुराण की भव्य महाआरती उतारी गई। शंख ध्वनि, करतल ध्वनि और भक्तिमय वातावरण के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने अलौकिक शांति और आनंद का अनुभव किया।

श्रीमद्भागवत महापुराण प्रवचन श्रृंखला प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक आशीष वाटिका, हिरण मगरी सेक्टर-13, उदयपुर में आयोजित की जा रही है, जो 25 मई तक चलेगी।


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