53 वर्षीय महिला ने जीती मौत से जंग, भामाशाह योजना के तहत हुआ पूरी तरह निःशुल्क उपचार

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Published on : 19 May, 26 14:05

45 दिन आईसीयू में वेंटिलेटर पर रहीं, गैंग्रीन और मल्टीड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया को हराकर स्वस्थ लौटीं घर

53 वर्षीय महिला ने जीती मौत से जंग, भामाशाह योजना के तहत हुआ पूरी तरह निःशुल्क उपचार

उदयपुर, आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) के चिकित्सकों ने गंभीर फेफड़ों के संक्रमण, रेस्पिरेटरी फेलियर, गैंग्रीन और कई जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही 53 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया। लगभग 45 दिनों तक आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद महिला अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गई है।

विशेष बात यह रही कि महिला का पूरा उपचार राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया, जिससे परिवार को बड़ी राहत मिली।

मरीज के सफल उपचार में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अतुल लुहाड़िया, थोरेसिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता, इंटेंसिविस्ट डॉ. चेतन गोयल, डॉ. इब्राहिम सहित रेस्पिरेटरी टीम के डॉ. निश्चय, डॉ. आमिर, डॉ. जल्पित, डॉ. गोविंद, डॉ. रितेश, डॉ. अंशुल, डॉ. साहिल, डॉ. अरविंद, डॉ. ऋचा, डॉ. अभय और डॉ. सुप्रिया तथा आईसीयू एवं चेस्ट वार्ड के नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

चित्तौड़गढ़ निवासी 53 वर्षीय महिला को अत्यधिक सांस फूलने, लगातार तेज खांसी और बलगम आने की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। जांच में पाया गया कि महिला के दोनों फेफड़ों में गंभीर निमोनिया फैल चुका था। साथ ही वह उच्च रक्तचाप और थायरॉयड जैसी बीमारियों से भी पीड़ित थीं, जिससे इलाज और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।

डॉ. अतुल लुहाड़िया ने बताया कि उपचार के दौरान महिला के हाथ के अंगूठे में अचानक रक्त प्रवाह रुक गया, जिससे गैंग्रीन जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। संक्रमण पूरे शरीर में फैलने से रोकने के लिए थोरेसिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता ने आपातकालीन थ्रोम्बेक्टॉमी सर्जरी कर अंगूठे को बचाया।

महिला की स्थिति लगातार बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। लंबे समय तक सांस लेने में सहायता की आवश्यकता को देखते हुए डॉक्टरों ने ट्रेकियोस्टॉमी करने का निर्णय लिया।

इलाज के दौरान मरीज में मल्टीड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया का संक्रमण भी पाया गया, जिसका विशेष एंटीबायोटिक्स के माध्यम से उपचार किया गया। लगातार निगरानी और विशेषज्ञों की टीम के प्रयासों से महिला की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।

करीब 45 दिन तक आईसीयू में इलाज के बाद महिला के फेफड़े अब सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, ऑक्सीजन की जरूरत पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में समय पर सही निर्णय, बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम और बेहतर आईसीयू केयर ही मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित होती है। उन्होंने कहा कि महिला की रिकवरी मेडिकल साइंस और टीमवर्क की एक बड़ी सफलता है।


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