बांसवाड़ा/जानी-मानी भाषाविद् एवं समीक्षक तथा वयोवृद्ध साहित्य चिन्तक डॉ. निर्मला शर्मा ने पुरातन सनातन परम्पराओं, मूल्यों और आदर्शों पर केन्द्रित साहित्य सृजन पर जोर दिया है और वर्तमान समय के रचनाकारों से इसके लिए आगे आने का आह्वान किया है।
डॉ. निर्मला शर्मा ने गायत्री मण्डल द्वारा संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में प्राच्यविद्या शोध एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित साहित्य चर्चा समागम में यह आह्वान किया।
उन्होंने सनातन वैदिक एवं पौराणिक परम्पराओं से संबंधित आख्यानों, उद्धरणों, पंचतंत्र की कथाओं, धार्मिक, आध्यात्मिक विषयों, ऋषि-मुनियों एवं सिद्ध तपस्वियों तथा प्रेरणा संचारपरक बोधात्मक विषयों पर सरल, सहज एवं सुबोधगम्य भाषा शैली एवं प्रभावी स्वरूप में सृजन तथा नई पीढ़ी के समक्ष परोसने के लिए सामूहिक स्तर पर सशक्त प्रयासों की आवश्यकता जताई।
डॉ. शर्मा ने धर्म, साहित्य और परम्पराओं के साथ ही भक्ति साहित्य तथा संत-भक्त कवियों की वाणियों, उपदेशों आदि पर चर्चा करते हुए इन्हें दैवत्व और दिव्यत्व प्राप्ति में सहायक कारक बताया और कहा कि वागड़ का संत साहित्य, भक्ति साहित्य व्यापक होने के साथ ही दुनिया भर में अद्भुत एवं अद्वितीय है। इस पर काम किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर गायत्री मण्डल की ओर से कोषाध्यक्ष अनन्त जोशी, एड्वोकेट यशपाल गुप्ता, चन्द्रेश व्यास, हरीश आचार्य एवं भंवर गर्ग ने उपरणा एवं शाल ओढाकर डॉ. निर्मला शर्मा का अभिनन्दन किया।
सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मा कवि एवं गीतकार हरीश आचार्य ने डॉ. निर्मला शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए वागड़ अंचल में शिक्षा, साहित्य एवं शोध के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को रेखांकित किया।
इस अवसर पर चन्द्रमोहन शर्मा, सौरभ रावल, अनिल पण्ड्या, ललित आचार्य, राजेन्द्र ठाकोर, देवर्षि भट्ट, वार्तिक जोशी, अंकित आचार्य, नीना गुप्ता, हेमांग जोशी, कपिल जोशी सहित गायत्री मण्डल के पदाधिकारी, सदस्य, आश्रम के कार्यकर्ता तथा काफी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।