आदिवासी अंचल की पीड़ा को समझने वाले दूरदर्शी नेता थे राजीव गांधी: लक्ष्मीनारायण पंड्या

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Published on : 22 May, 26 13:05

धनोल गांव की एक यात्रा से जन्मीं सस्ता अनाज, आवास और ग्रामीण विकास की कई ऐतिहासिक योजनाएं

आदिवासी अंचल की पीड़ा को समझने वाले दूरदर्शी नेता थे राजीव गांधी: लक्ष्मीनारायण पंड्या

उदयपुर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पुण्यतिथि पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व उप जिला प्रमुख लक्ष्मीनारायण पंड्या ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राजीव गांधी केवल देश के प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि वे ग्रामीण भारत, आदिवासी समाज और गरीबों के दर्द को समझने वाले संवेदनशील एवं दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने कहा कि आज देश में ग्रामीण विकास, संचार क्रांति, पंचायती राज और गरीब कल्याण से जुड़ी जो व्यवस्थाएं दिखाई देती हैं, उनकी मजबूत नींव राजीव गांधी ने ही रखी थी।


पंड्या ने बताया कि वर्ष 1985 में राजीव गांधी अपनी पत्नी Sonia Gandhi के साथ उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र खेरवाड़ा के धनोल गांव पहुंचे थे। यह यात्रा सामान्य राजनीतिक दौरा नहीं थी, बल्कि एक आदिवासी की पीड़ा को समझने का प्रयास था। उन्होंने बताया कि एक ग्रामीण द्वारा भेजे गए टेलीग्राम को राजीव गांधी ने गंभीरता से लिया और तय किया कि वे उस गांव की वास्तविक स्थिति स्वयं जाकर देखेंगे।

उन्होंने कहा कि उस समय धनो ल गांव तक सड़क तक नहीं थी। बारिश के मौसम में कीचड़ और नालों से भरे रास्तों पर लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर राजीव गांधी वहां पहुंचे। उनके साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी, शीला कौल और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। गांव के एक पहाड़ी टापरे में रहने वाली वृद्ध महिला धनुबाई से मिलकर राजीव गांधी भावुक हो गए। जब उस महिला को बताया गया कि “इंदिरा गांधी का बेटा” उसके घर आया है, तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने किसी प्रकार की मांग नहीं रखी, बल्कि केवल इतना कहा कि “इंदिरा जी के बेटे को सुरक्षित वापस पहुंचा देना।” इस भावनात्मक दृश्य ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

लक्ष्मीनारायण पंड्या ने बताया कि राजीव गांधी ने जब उस परिवार की स्थिति देखी, तो उन्हें पता चला कि वे गेहूं की रोटी तक नहीं खा पाते थे और मोटे अनाज से किसी तरह गुजारा करते थे। इसके बाद उन्होंने गरीबों के लिए सस्ता अनाज योजना की शुरुआत की, जिसके तहत सब्सिडी दरों पर गेहूं उपलब्ध कराया जाने लगा। इसी प्रकार जब उन्होंने देखा कि आदिवासी परिवार टपकती झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, तब इंदिरा आवास योजना की परिकल्पना की गई, जिससे गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने कहा कि गांव में बिजली की लाइनें होने के बावजूद गरीब परिवार कनेक्शन नहीं ले पा रहे थे क्योंकि उनके पास डिमांड राशि और फिटिंग का खर्च नहीं था। इस समस्या को समझते हुए गरीबों के लिए निशुल्क बिजली कनेक्शन और एक बल्ब योजना शुरू की गई। वहीं सिंचाई की समस्या को देखते हुए जीवनधारा कुआं योजना लागू की गई, जिसके माध्यम से गरीब किसानों को कुएं खुदवाने में सहायता दी गई।

पंड्या ने कहा कि राजीव गांधी ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी ऐतिहासिक पहल की। उन्होंने देशभर के सरपंचों को दिल्ली बुलाकर गांवों की समस्याएं सुनीं और ग्राम पंचायतों को सीधे आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था लागू की। उस समय पहली बार दिल्ली से सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में राशि भेजी गई, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिली। आज गांवों में सीसी सड़कें, नालियां, बिजली, स्कूल और अन्य आधारभूत सुविधाएं दिखाई देती हैं, तो उसमें राजीव गांधी की सोच और दूरदृष्टि का बड़ा योगदान है।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने हमेशा यह माना कि जब तक गांव मजबूत नहीं होंगे, तब तक देश मजबूत नहीं हो सकता। यही कारण है कि उन्होंने ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू कीं। आज भी उनकी सोच और योजनाएं करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।


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