भक्ति, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के संग संपन्न हुई श्रीमद्भागवत गीता कथा, निकली भव्य कलश यात्रा

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Published on : 26 May, 26 03:05

भक्ति, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के संग संपन्न हुई श्रीमद्भागवत गीता कथा, निकली भव्य कलश यात्रा


उदयपुर। सेन समाज विकास संस्थान के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत गीता कथा का श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन यज्ञ-हवन, भजन संध्या एवं विशाल कलश यात्रा के आयोजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में समाज की महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धार्मिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का परिचय दिया।
संस्था के मीडिया प्रभारी सोनू सेन ने बताया कि समापन समारोह का शुभारंभ भजन गायक देवेंद्र सेन एवं चेतना सेन द्वारा प्रस्तुत गणपति वंदना और भक्तिमय भजनों से हुआ। इसके पश्चात व्यासपीठ से कथावाचक पंडित खेम शंकर शास्त्री ने श्रीमद्भागवत गीता कथा का सार प्रस्तुत करते हुए मानव जीवन में धर्म, संस्कार, सेवा और अध्यात्म के महत्व को विस्तार से समझाया।
कथा उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर समाज एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा सेन भवन, मास्टर कॉलोनी से प्रारंभ होकर महादेव मंदिर तक पहुंची। यात्रा में सैकड़ों समाजजन शामिल हुए, जिन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण एवं ठाकुरजी को सिर पर धारण कर भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम के दौरान कथावाचक पंडित खेमशंकर शास्त्री, पंडित हितेश जोशी तथा भजन गायक देवेंद्र सेन एवं चेतना सेन का मेवाड़ी पगड़ी, उपरना, शॉल, प्रतीक चिन्ह एवं भेंट राशि देकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. ओम प्रकाश बारबर, महामंत्री महेंद्र कुमार शर्मा, शिक्षा एवं सांस्कृतिक मंत्री प्रदीप पंवार, कोषाध्यक्ष जगदीश सेन, बालकिशन वर्मा, बंसीलाल सेन, महेशचंद्र सेन, समाजसेवी मुकेश पंवार, एडवोकेट हेमंत सेन, विमला सेन, नर्बदा सेन, निर्मला शर्मा, वेसर सेन, ऊषा सेन एवं राजकुमारी सेन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
अंत में सभी श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धर्ममय आयोजन का समापन किया। कार्यक्रम ने समाज में धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।


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