जल संरक्षण में जनभागीदारी एवं सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित

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Published on : 27 May, 26 16:05

जल संरक्षण में जनभागीदारी एवं सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला आयोजित

           जैसलमेर। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026” के तहत बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में जिला स्तरीय अधिकारियों, प्रमुख सीएसआर कंपनियों, कॉर्पोरेट एवं वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा औद्योगिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

          कार्यशाला का शुभारम्भ जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र जैसलमेर की महाप्रबंधक संतोष कुमारी द्वारा स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 के माध्यम से पारंपरिक जल संरक्षण संरचनाओं जैसे खड़ीन, टांका एवं नाड़ी के संरक्षण एवं  पुनरुद्धार का व्यापक कार्य कर रही है। इन प्रयासों से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ जल उपलब्धता में भी सुधार हो रहा है।

         उन्होंने कहा कि 25 मई से 5 जून 2026 तक आयोजित हो रहे वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत इस सीएसआर कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत स्वीकृत कार्यों में गैप फंडिंग के लिए अधिकाधिक जनसहयोग एवं सीएसआर सहयोग प्राप्त करना है। साथ ही निजी क्षेत्र, औद्योगिक संगठनों एवं कॉर्पोरेट संस्थाओं की जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।

         कार्यक्रम में जलग्रहण एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा “वंदे गंगा अभियान” तथा मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 की विस्तृत जानकारी पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी गई। प्रस्तुति में जिले की जल आवश्यकताओं, सरकारी पहलों एवं जनसहभागिता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उद्यमियों एवं कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों को गैप फंडिंग के लिए प्रेरित किया गया।

         इसी क्रम में “कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान” के नोडल अधिकारी एवं प्रभारी भूजल वैज्ञानिक डॉ. डॉ. नारायणदास ईणखिया ने राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सीएसआर, क्राउड फंडिंग एवं भामाशाहों के सहयोग से जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इससे वर्षा जल संरक्षण के साथ भूजल स्तर में सुधार होगा एवं जिला जल आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा। इस दौरान जल पुनर्भरण संरचनाओं, वर्षा जल संचयन एवं भूजल सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

         कार्यशाला को संबोधित करते हुए विधायक भाटी ने कहा कि मरुस्थलीय जैसलमेर जिले में जल संरक्षण केवल आवश्यकता नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सीएसआर कंपनियों से पर्यावरण संरक्षण, अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं स्थायी जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक एवं प्रभावी जल प्रबंधन समाधान विकसित करने पर विशेष बल दिया।

          कार्यक्रम के अंत में मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके सुझाव आमंत्रित किए। विभिन्न सीएसआर कंपनियों एवं औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जल संरक्षण संबंधी कार्यों को क्रियान्वित करने से पूर्व समिति स्तर पर अनुमोदित किया जाए, जिससे योजनाओं का प्रभावी एवं समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 के तहत स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।


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