उदयपुर। रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग ने संभाग के किडनी रोगियों के उपचार में पहली बार कॉन्टिनुअस एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (सीएपीडी) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस पद्धति की शुरुआत से अब गंभीर किडनी मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में लगने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. पंकज बेनीवाल ने बताया कि सीएपीडी एक ऐसी उन्नत डायलिसिस पद्धति है जिसे मरीज घर पर रहकर भी स्वयं या अपने परिजनों की मदद से कर सकता है। इस प्रक्रिया में मरीज के पेट में एक विशेष कैथेटर लगाया जाता है, जिसके माध्यम से डायलिसिस द्रव अंदर डाला जाता है। यह द्रव शरीर के भीतर मौजूद तमाम विषैले पदार्थों और अतिरिक्त पानी को सोखकर बाहर निकाल देता है। प्रशिक्षित होने के बाद मरीज बिना किसी अस्पताल की निर्भरता के, घर के सुरक्षित माहौल में अपनी सुविधानुसार इसे कर सकता है।
किन मरीजों के लिए है यह वरदान-
यह तकनीक विशेष रूप से उन किडनी रोगियों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी जिनमें सामान्य हेमोडायलिसिस के दौरान ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) बार-बार गंभीर स्तर तक गिर जाता है। जिनकी नसों में डायलिसिस के लिए एक्सेस बनाना बेहद कठिन या असंभव होता है। जो गंभीर हृदय रोग से ग्रसित हैं या जो सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और डायलिसिस सेंटर तक नियमित नहीं पहुंच सकते।
बाल रोग आयु वर्ग के छोटे बच्चे और 21 वर्षीय महिला मरीज को मिला लाभ
नेफ्रोलॉजी विभाग में यह प्रक्रिया एक 21 वर्षीय क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित युवती में सफलतापूर्वक की गई। यह मरीज पिछले 3 महीनों से नियमित हेमोडायलिसिस पर थी, लेकिन डायलिसिस के दौरान उसका ब्लड प्रेशर लगातार अस्थिर हो रहा था और डायलिसिस एक्सेस की गंभीर समस्या आ रही थी। जटिलताओं को देखते हुए चिकित्सकों ने सीएपीडी का निर्णय लिया। अब यह मरीज अस्पताल आए बिना घर पर ही डायलिसिस कर सकेगी, जिससे उसके समय और यात्रा खर्च की बचत होगी तथा उसे एक स्वतंत्र जीवन मिल सकेगा। राहत की बात यह है कि यह संपूर्ण सुविधा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के अंतर्गत पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है।
आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं नियंत्रक डॉ. राहुल जैन ने नेफ्रोलॉजी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज का उद्देश्य हमेशा संभाग के अंतिम छोर पर बैठे मरीज तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना रहा है। नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा सीएपीडी की सफल शुरुआत हमारे इसी संकल्प का हिस्सा है। इस सुविधा से विशेषकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के उन गरीब मरीजों को संबल मिलेगा जो बार-बार शहर आकर डायलिसिस का खर्च और शारीरिक कष्ट उठाने को मजबूर थे। हमारी प्राथमिकता मरीजों को बिना किसी वित्तीय भार के सर्वोत्तम इलाज देना है।
सफलता हासिल करने वाली विशेषज्ञ टीम
यह प्रक्रिया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पंकज बेनीवाल के कुशल निर्देशन तथा सहायक आचार्य डॉ. हर्षा मखीजा एवं डॉ. जयदीप राज डामोर के तकनीकी मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस जटिल कार्य में रेजीडेंट चिकित्सक डॉ. अपूर्वा परमार, डॉ. अस्वथी जोसेफ, डॉ. सुमेश निरवान, डॉ. योगेश तंवर एवं डॉ. उत्तम रॉय ने सक्रिय सहयोग दिया। इसके अतिरिक्त सीएपीडी कोऑर्डिनेटर आदित्य पंचोली तथा विभाग के कर्मठ स्टाफ सदस्य भगवती एवं विजेंदर ने इस प्रक्रिया के सुचारू संपादन और समन्वय में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विपिन माथुर ने इस तकनीकी विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में पहली बार सीएपीडी सुविधा का सफलतापूर्वक प्रारंभ होना हमारे संस्थान के लिए एक बड़ी चिकित्सकीय प्रगति है। यह तकनीक उन क्रिटिकल मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी जो गंभीर हृदय रोग या खून की नसों की समस्याओं के कारण नियमित हेमोडायलिसिस नहीं करवा पाते थे। हमारा ध्यान केवल अस्पताल के भीतर उत्कृष्ट इलाज देने पर नहीं, बल्कि मरीजों के जीवन स्तर को सुगम बनाने पर भी है। घर पर डायलिसिस की यह सुविधा मरीजों को एक नई स्वतंत्रता और मानसिक संबल प्रदान करेगी