उदयपुर। कर्मचारियों की मांगों की उपेक्षा व उदासीन रवैये को लेकर अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश व्यापी आंदोलन की कड़ी में उदयपुर में भी वन कर्मचारियों ने सांकेतिक आंदोलन प्रारंभ किया। जिला अध्यक्ष प्रदीप गर्ग ने बताया कि आंदोलन के तहत वन विभाग के कर्मचारी बड़ी संख्या में कार्यालय छोड़कर मुख्य द्वार पर एकञित होकर महासंघ के प्रदेश संगठन मंञी धुलसिंह चुंडावत के नेतृत्व में नारेबाजी व प्रदर्शन कर गेट मीटिंग व सभा की। सभा को महासंघ के प्रदेश संगठन मंञी धुलसिंह चुंडावत ने संबोधित कर सरकार द्वारा रोके गये सरेंडर लीव का अविलंब भुगतान करने, आरजीएचएस को निजी बीमा कम्पनी को नहीं सौंपने का लिखित में आश्वासन, एसीपी 8, 16, 24, 32 पर देने, पदोन्नति में दो वर्ष की शिथिलता, वेतन विसंगतियों का समाधान, मंञालयिक, वाहन चालकों, अधीनस्थ कर्मियों, निजी सहायकों, चतुर्थ श्रेणी के मांग पञो का निस्तारण, संविदा व ठेका कर्मियों को नियमित करने सहित 25 सूञीय मांग पञ के निस्तारण पर सरकार द्वारा विचार नहीं किये जाने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है मुख्य मंञी अविलंब सकारात्मक निर्णय करने कर कर्मचारियों से किया वायदा निभावें। सभा को महासंघ के प्रदेश संरक्षक ओमप्रकाश श्रीमाली ने संबोधित कर कहा कि सरकार बजट घोषणा ही भुल गई एवं अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में एक भी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने से कर्मचारीयों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी। सभा को वन विभागीय समिति के अध्यक्ष भूपेन्द्र शर्मा, वाहन चालक संघ वन विभाग के अजीत मेडतिया, राजेश गरासिया, कचरुलाल मीणा, नारायण सिंह कुमपावत , योगेश राणा , मंजू , यशोदा मेनारिया, नानालाल गमेती, रायलाराम गरासीया, सेजल कुॅवर, कीरण कॅवर आदि ने भी संबोधित कर सरकार से मांगो पर सकारात्मक निर्णय करने की मांग की साथ ही कर्मचारियों को आह्वान किया कि वो संघर्ष के लिये तैयार रहे ।