उदयपुर, उच्च शिक्षा में बढ़ते डिजिटलीकरण के दौर में विद्यार्थियों की सुविधाओं और उनकी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय परिसर में ऑफलाइन ष्स्टूडेंट हेल्प डेस्कष् को पुनः शुरू करने की मांग उठाई गई है। कंस्यूमर प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों ने कुलगुरु डॉ. कैलाश डागा को ज्ञापन सौंपकर विद्यार्थियों के हित में इस सुविधा को जल्द बहाल करने का आग्रह किया।
संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ. राजश्री गांधी, राष्ट्रीय समन्वयक शिरीष नाथ माथुर, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत झा एवं जिला अध्यक्ष प्रवीण नाहर के निर्देशन में युवा प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व छात्रसंघ सदस्य गजेंद्र सिंह भाटी ने कुलगुरु से मुलाकात कर विद्यार्थियों की समस्याओं से अवगत कराया।
ज्ञापन में बताया गया कि विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 1.75 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की है। इंटरनेट कनेक्टिविटी की सीमित उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण अनेक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परिणामस्वरूप उन्हें विभिन्न कार्यों के लिए ई-मित्र केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों का अतिरिक्त व्यय होता है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऑफलाइन हेल्प डेस्क विद्यार्थियों के लिए प्रवेश, परीक्षा, छात्रवृत्ति, अंकतालिका, माइग्रेशन, दस्तावेज सत्यापन एवं अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। इसके अभाव में दूर-दराज के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
राष्ट्रीय समन्वयक शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 उच्च शिक्षा में समावेशी एवं सुलभ व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल देती है। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार भी विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष सहायता उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालयों में छात्र सेवा केंद्रों की व्यवस्था आवश्यक मानी गई है। इसके अतिरिक्त छात्र शिकायत निवारण संबंधी नियमों में भी ऑफलाइन सहायता और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
कुलगुरु डॉ. कैलाश डागा ने विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ष्स्टूडेंट हेल्प डेस्कष् को पुनः शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में ही आवश्यक सहायता उपलब्ध हो सके।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी साबित होगी तथा उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।