पोस्टर विमोचन के साथ संस्कृत भारती के आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग की तैयारियां तेज

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Published on : 30 May, 26 16:05

3 जून से उदयपुर में होगा छह दिवसीय संस्कृतमय आवासीय वर्ग

पोस्टर विमोचन के साथ संस्कृत भारती के आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग की तैयारियां तेज

उदयपुर। भारतीय संस्कृति, वैदिक ज्ञान परंपरा एवं संस्कृत संभाषण को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृत भारती उदयपुर विभाग (चित्तौड़ प्रांत) की ओर से 3 जून से 8 जून 2026 तक होने वाले आवासीय संस्कृत भाषाबोधन वर्ग के पोस्टर का विमोचन शनिवार को किया गया। यह वर्ग विद्या निकेतन बालिका विद्यालय, हिरण मगरी सेक्टर-4, उदयपुर में होने जा रहा है। 

पोस्टर विमोचन समारोह में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. कर्नल शिव सिंह सारंगदेवोत, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य, प्रो. तरुण श्रीमाली, प्रो. पारस जैन, दुष्यंत नागदा, श्रीयांश कंसारा, डॉ. यज्ञ आमेटा सहित कई गणमान्य नागरिक एवं संस्कृत प्रेमी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति, दर्शन, आध्यात्मिकता तथा जीवन मूल्यों की आधारशिला है। संस्कृत के माध्यम से भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। वर्तमान समय में संस्कृत को व्यवहार की भाषा बनाने तथा समाज में संस्कृत संभाषण का वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता है।

वर्ग संयोजक संजय शांडिल्य ने बताया कि वर्ग की व्यवस्थाओं को लेकर आयोजित बैठक में विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई। संस्कृत भारती द्वारा पूर्व वर्षों में आयोजित संभाषण शिविरों की उल्लेखनीय सफलता तथा युवाओं में संस्कृत के प्रति बढ़ते उत्साह को देखते हुए इस बार का वर्ग विशेष रूप से भाषा शिक्षण, व्यक्तित्व विकास, भारतीय संस्कार चेतना एवं संगठनात्मक विस्तार की व्यापक संकल्पना को केंद्र में रखकर आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्ग पूर्णतः आवासीय एवं संस्कृतमय वातावरण में संचालित होगा। प्रतिभागियों को संस्कृत माध्यम से संवादात्मक एवं व्यवहारिक शिक्षण प्रदान किया जाएगा। दैनिक कार्यक्रमों में योगाभ्यास, प्रार्थना, गीत, संस्कार गतिविधियां तथा संस्कृत संभाषण का अभ्यास शामिल रहेगा। खेल-खेल में संस्कृत सीखने की अभिनव पद्धति के माध्यम से प्रतिभागियों को सरलता से संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा।

वर्ग में संस्कृत माध्यम से गीत, नाट्य प्रस्तुति, समूह चर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पंचांग ज्ञान, प्रेरक कथाएं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित परिचर्चाएं होंगी। इसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव विकसित किया जाएगा।

विभाग संयोजक दुष्यंत नागदा ने कहा कि आज आवश्यकता केवल संस्कृत पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे जीवन व्यवहार में उतारने की है। संस्कृत हमारी प्राचीन ज्ञान-विज्ञान परंपरा, भारतीय चिंतन और सांस्कृतिक चेतना की मूल आधारशिला है। यदि युवा पीढ़ी संस्कृत संभाषण से जुड़ेगी तो भारतीय जीवन मूल्यों एवं राष्ट्रीय संस्कारों का पुनर्जागरण सहज रूप से संभव होगा।

उन्होंने बताया कि पूर्व में आयोजित संभाषण शिविरों में प्रतिभागियों ने खेल-खेल में संस्कृत बोलना, शुद्ध उच्चारण, श्लोक पाठ तथा संवाद कौशल का अभ्यास किया था। शिविरों के संस्कृतमय वातावरण ने प्रतिभागियों में आत्मीयता, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव विकसित किया। यही कारण है कि संस्कृत भारती के कार्यक्रमों को समाज के विभिन्न वर्गों से निरंतर प्रोत्साहन एवं सहयोग प्राप्त हो रहा है। 

संस्कृत भारती उदयपुर विभाग के पदाधिकारियों ने अधिकाधिक संस्कृत प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवाओं से इस आवासीय वर्ग में सहभागिता का आह्वान किया है। आयोजकों के अनुसार यह वर्ग संस्कृत को व्यवहार की भाषा बनाने तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ग की विभिन्न व्यवस्थाओं का दायित्व दुष्यंत नागदा, नरेंद्र शर्मा, श्रीयांश कंसारा, मंगल जैन, डॉ. रेनू पालीवाल, रेखा सिसोदिया, कुलदीप जोशी, भूपेंद्र शर्मा, डॉ. भगवती शंकर व्यास, चैनशंकर दशोरा, डॉ. यज्ञ आमेटा, सत्य प्रिय, जूली सोनी, मीनाक्षी त्रिवेदी, हेमंत कुमार एवं मनीष कुमार सहित कई कार्यकर्ताओं को सौंपा गया है।

वर्ग में विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों, गृहिणियों तथा विभिन्न व्यवसायों से जुड़े संस्कृत अनुरागियों को संस्कृत को सरल, व्यवहारिक एवं संवादात्मक रूप में सीखने का अवसर मिलेगा। शिविर की विशेषता यह रहेगी कि संपूर्ण वातावरण संस्कृतमय होगा तथा दैनिक व्यवहार से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियों तक सभी कार्यक्रम संस्कृत माध्यम से संचालित किए जाएंगे।

वर्ग में आयोजित होने वाले प्रमुख सत्रों में शामिल हैं—

संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण
पंचांग एवं भारतीय कालगणना परिचय
योग एवं प्राणायाम
संस्कार गीत एवं समूह गान
प्रेरक कथाएँ एवं वैदिक चिंतन
व्यक्तित्व विकास एवं नेतृत्व निर्माण
भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित विशेष परिचर्चाएँ
 


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