इतिहास एवं संस्कृति शोध लेखन को समर्पित इतिहासकार प्रो.(डॉ.) बृज किशोर शर्मा, जयपुर

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Published on : 31 May, 26 10:05

लेखक - डॉ. प्रभात कुमार सिंघल लेखक एवं पत्रकार, कोटा

इतिहास एवं संस्कृति शोध लेखन को समर्पित  इतिहासकार प्रो.(डॉ.) बृज किशोर शर्मा, जयपुर

इतिहासकार प्रो.(डॉ.) बृज किशोर शर्मा का जन्म 7 जुलाई 1953 को माता श्रीमती किसन प्यारी एवं पिता कन्हैंया लाल शर्मा के परिवार में अलवर जिले की कठूमर तहसील के गाँव गारू में किसान परिवार हुआ। इतिहास विषय में एम. ए.एम. फिल. की शिक्षा प्राप्त कर पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। इन्होंने 1980 में राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के इतिहास और संस्कृति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर प्रोफेसर पद पर सेवाएं आरम्भ की और 1988से 2013 के दौरान कोटा खुला विश्विद्यालय के इतिहास विभाग में सेवाएं दीं हैं। आपको राजस्थान के पहले खुला विश्वविद्यालय कोटा में का लंबा अनुभव प्राप्त हुआ और आप इसी विश्वविद्यालाय जिसका नाम बाद में बदल कर वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा हो गया, से प्रोफेसर इतिहास के रूप में सेवानिवृत्त हुए। आपको अपने सेवाकाल में इतिहास विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया। आपकी योग्यता और कुशलता की वजह से विभिन्न अकादमिक पदों में शैक्षणिक मीडिया उत्पादन केंद्र, रजिस्ट्रार, डायरेक्ट-एकेडमिक, डायरेक्टर-सेंटर फॉर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस, डायरेक्टर स्टाफ ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट इन डिस्टेंस एजुकेशन, डायरेक्टर रिजनल सर्विस, रिसर्च एवं डायरेक्टर मैटेरियल प्रोडक्शन एवं डिस्ट्रीब्यूशन के पदों पर नियुक्त किया गया, जिससे आपको अपनी प्रशासनिक दक्षता प्रदर्शित करने सातिका अवसर प्राप्त हुआ। यही नहीं आप वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय में प्रबन्धन बोर्ड, वित्त समिति, एकेडमिक परिषद के साथ-साथ इतिहास कांग्रेस, राजस्थान इतिहास कांग्रेस और एशियन एसोसियेशन ऑफ ओपन यूनिवर्सिटीज के सदस्य भी रहे। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में अध्यापन कार्य कर चुके हैं।

   आपको संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञान के साथ - साथ ब्रज,भोजपुरी, बुन्देली और राजस्थान की बोलियों का पर्याप्त ज्ञान है। ये  मूलतः इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में लिखते हैं। ये अब तक 10 शोध परियोजना पूर्ण कर चुके हैं और इनके 125 शोध पत्र विभिन्न  शोध पत्रिकाओं और जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं एवं 85 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाग लिया है। इनके निर्देशन में भारतीय प्रशासनिक सेवा के विद्यार्थियों सहित 15 शोधार्थियों ने पीएच.डी.की उपाधि प्राप्त की है। आप इतिहास और संस्कृति के अध्ययन के लिए कई देशों फ्रांस, मलेशिया, थाईलैंड, यू एस ए, इंग्लैंड, इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, रोम, नीदरलैंड ,स्विट्ज़रलैंड, श्री लंका का भ्रमण कर चुके हैं। मीडिया पर अपने यू ट्यूब चैनल  पर आधुनिक भारत का इतिहास से संबंधित 59 वीडियों बनाकर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराए हैं। 

          आपका लेखन और प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ आधुनिक भारत एवं राजस्थान के इतिहास से सम्बन्धित हैं। हिन्दी भाषा की  पुस्तकें --  समसामयिक भारत (1947-2000), भारत का इतिहास (1750-1950), राजस्थान में किसान एवंआदिवासी आंदोलन 9 वां संस्करण, आधुनिक राजस्थान का आर्थिक इतिहास, सामंतवाद एवं किसान संघर्ष प्रकाशित हुई हैं। अंग्रेजी भाषा की पुस्तकें --  इंडस्ट्रियल डवलपमेन्ट इन इण्डिया (1850-1950),  ट्रेड यूनियन मूवमेंट इन इण्डिया (1850-1950), एग्रेरियन मूवमेन्ट इन इण्डिया, पीजेन्ट मूवमेण्ट्स इन राजस्थान, ट्राइबल रिवोल्टस, पर्सपेक्टिव ऑन मॉडर्न इकॉनामिक एण्ड सोशल हिस्ट्री, मास मूवमेन्ट्स एण्ड फ्रीडम स्ट्रगल इन राजस्थान, सोशल इकॉनामिक एण्ड पॉलिटिकल कन्ट्रीब्यूशन ऑफ कास्ट एसोसिएशन इन नॉर्दन इण्डिया (ए केस स्टडी ऑफ ऑल इण्डिया जाट महासभा), कास्ट पॉलिटिक्स इन इण्डिया सिंस इंडिपेंडेंस एवं राइज एण्ड ग्रोथ ऑफ आर्य समाज मूवमेन्ट प्रकाशित हुई हैं।

      आपको दो बार राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी राजस्थान से लेखक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आप भारतीय समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के वरिष्ठ अध्येता (सीनियर फेलो) एवं भारतीय इतिहास अनुसंधन परिषद, नई दिल्ली के वरिष्ठ अकादमिक अध्येता (सीनियर एकेडमिक फेलो) रह चुके हैं। आपको संघ लोक सेवा आयोग, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं विश्वविद्यालय की चयन समितियों में विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। सेवा निवृति के उपरांत निरंतर इतिहास एवं संस्कृति लेखन एवं शोध में सक्रिय हैं।


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